‘मिसाइल मैन’ पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का निधन, 7 दिन का राजकीय शोक

शिलांग।… ‘मिसाइल मैन’ और ‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में लोकप्रिय रहे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का सोमवार शाम शिलांग आईआईएम में एक व्याख्यान देने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। केंद्र सरकार ने उनके सम्मान में सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।
डॉ. कलाम को शाम करीब साढे छह बजे व्याख्यान के दौरान गिरने के बाद नाजुक हालत में बेथानी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया और उसके दो घंटे से अधिक समय बाद उनके निधन की पुष्टि की गई। डॉ. कलाम अक्टूबर में 84 साल के होने वाले थे।

शाम को करीब पांच बजकर 40 मिनट पर भारतीय प्रबंधन संस्थान पहुंचने के बाद कलाम ने कुछ समय आराम किया और उसके बाद शाम छह बजकर 35 मिनट पर ‘जीवन योग्य ग्रह’ विषय पर अपना व्याख्यान शुरू किया। आईआईएम शिलांग के निदेशक प्रोफेसर अमिताभ डे ने बताया कि इसके पांच मिनट बाद ही कलाम गिर पड़े।

कलाम ने अंतिम ट्विट किया था, ‘जीवन जीने योग्य ग्रह पर आईआईएम में क्लास लेने के लिए शिलांग जा रहा हूं।’ शाम सात बजे उन्हें संस्थान से करीब एक किलोमीटर दूर बेथानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डे ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बताया कि कलाम का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है।

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को सोमवार शाम जब यहां बेथानी अस्पताल लाया गया तो उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉ. कलाम का इलाज करने वाले एक डॉक्टर ने यह जानकारी दी। अस्पताल लाए जाने के बाद उन्हें देखने वाले विशेषज्ञ डॉ. ए.एम. खरबामोन ने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें पौने आठ बजे मृत घोषित कर दिया गया।

यह पूछे जाने पर कि क्या अस्पताल लाए जाने से पूर्व उनका निधन हो चुका था, खरबामोन ने बताया, ‘कलाम में प्राण होने के कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन इसकी घोषणा नहीं की गई थी। यहां लाए जाने के समय उनकी सांस नहीं चल रही थी, नब्ज भी नहीं चल रही थी, कोई ब्लड प्रेशर भी नहीं था और उनकी पुतलियां फैल चुकी थीं।’

डॉ. खारबामोन ने बताया, ‘हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका। उन्हें 7.45 बजे मृत घोषित कर दिया गया। मौत का कारण अचानक दिल का दौरा पड़ना था।’ डॉ. कलाम के पार्थिव शरीर को सैन्य अस्पताल ले जाया गया है और रात में उन्हें वहीं पर रखा गया। वायुसेना के हेलिकॉप्टर द्वारा पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे गुवाहाटी ले जाया जाएगा और उसके बाद विशेष विमान से दिल्ली ले जाया जाएगा।

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देश के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति माने जाने वाले कलाम ने 18 जुलाई 2002 को देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला लेकिन राष्ट्रपति पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए उनके नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। वह राजनीतिक गलियारों से बाहर के राष्ट्रपति थे।

केंद्रीय गृह सचिव एल.सी. गोयल ने बताया कि केंद्र द्वारा सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की जाएगी, जो बाद में कर दी गई। संसद के दोनों सदनों में मंगलवार को कलाम को श्रद्धांजलि देने के बाद उनके सम्मान में सदन की कार्यवाही स्थगित किए जाने की संभावना है।

कलाम को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की खबर मिलने के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचे मेघालय के राज्यपाल वी. षणमुगम ने बताया कि कलाम ने शाम सात बजकर 45 मिनट पर अंतिम सांस ली। डॉक्टरों की असीम कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका।

मुख्य सचिव पीबीओ वारजिरी ने अस्पताल के बाहर संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने कलाम के पार्थिव शरीर को मंगलवार को गुवाहाटी से नई दिल्ली ले जाने का इंतजाम करने के लिए केंद्रीय गृह सचिव एल.सी. गोयल से जरूरी प्रबंधन करने के वास्ते बातचीत की है।

सैन्य अस्पताल और नार्थ इस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (एनईआईजीआरआईएचएमएस) के डॉक्टरों ने बेथानी अस्पताल पहुंच कर उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे। विभिन्न दलों के नेताओं ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर डॉ. कलाम के निधन पर शोक प्रकट किया और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें ‘जनता का राष्ट्रपति’ और एक ऐसा ‘प्रेरणादायी नेता’ बताया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

केंद्रीय कैबिनेट की नई दिल्ली में मंगलवार को एक बैठक होगी, जिसमें कलाम के निधन पर संवेदना जताने के साथ ही राष्ट्र के प्रति उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।