अवतार स्वरूप है WhatsApp, देवभूमि के पंडितों को भी आ रहा खूब रास

दुनियाभर में इंटरनेट लगातार नए-नए कीर्तिमान कायम कर रहा है। इंटरनेट के फीवर से भारत और अपना उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। हर किसी पर फेसबुस, ट्विटर और व्हाट्सऐप का बुखार छाया हुआ है। अब तो पारंपरिक अनुष्ठानों में भी इंटरनेट से जुड़े ये ऐप अच्छी खासी भूमिका निभा रहे हैं। इस खुमार से धार्मिक कर्मकांडी पंडित भी अब पीछे नहीं हैं।

‘व्हाट्सऐप’ के जरिये पंडिताई एक नया चलन सामने आया है। वर्तमान में चल रहे सावन में पंडितजी को ‘व्हाट्सऐप’ की उपयोगिता खासी लुभा रही है। सोशल मीडिया में भी ‘व्हाट्सऐप’ छाया है। सावन में आयोजित किए जा रहे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं महाशिवपुराण कथा में ‘व्हाट्सऐप’ का जादू पंडितों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

पुराणों के जानकार पंडित कहते हैं कि दरअसल सावन में पार्थिव पूजा, शिव स्तुति के दौरान भगवान शिव के सौ स्वरूपों की गणना या नाम तत्काल याद न आने, पूजा विधि में किसी विशेष कर्मकांड की जानकारी न होने पर ‘व्हाट्सऐप’ में एक-दूसरे से पूछकर लोग मदद ली जा रही है।

कर्मकांडी पंडित कैलाश जोशी का कहना है कि जब हम किसी नई जानकारी के लिए इंटरनेट या सोशल मीडिया की मदद ले सकते हैं, तो उसका अपने व्यवसाय में इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते।

पंडित बसंतबल्लभ पांडेय के अनुसार वर्तमान में पंडिताई के व्यवसाय में लगे अधिकांश पंडित सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। ‘व्हाट्सऐप’ के जरिए एंड्रॉयड फोन में फोटो और वीडियो मैसेज का आदान-प्रदान बहुत तेजी से होता है, इसलिए अधिकांश लोग इसे अपना रहे हैं।

मंदिरों में की जाने वाली विशेष पूजा-अर्चना की वीडियो फिल्मों का ‘व्हाट्सऐप’ में आसानी से और बहुत जल्द आदान-प्रदान हो जाता है। साथ ही व्हाट्सऐप के जरिये सूचना का आदान-प्रदान भी तत्काल हो जाता है।