कभी भी आ सकती है भीषण प्राकृतिक आपदा, 400 गांवों को तुरंत विस्थापित करने की सिफारिश

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदा कोई नई बात नहीं है। इसीलिए संसद की एक समिति ने प्राकृतिक आपदा के लिहाज से उत्तराखंड के चार सौ बेहद संवेदनशील गांवों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने की सिफारिश की है।

समिति ने केंद्र सरकार से कहा कि वह उत्तराखंड सरकार की तरफ से इस बारे में भेजी गई मांग पर तुरंत कार्रवाई करे। समिति की रिपोर्ट गुरुवार को संसद में पेश की गई थी। कांग्रेस सांसद अश्विनी कुमार की अध्यक्षता वाली विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्रालय से संबद्ध संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तराखंड में बड़े भूकंप एवं प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना हुआ है।

समिति ने इस बारे में राज्य सरकार और केंद्र को आगाह किया है तथा प्राकृतिक आपदा के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील 400 गांवों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की है। राज्य सरकार ने इस कार्य के लिए केंद्र से दस हजार करोड़ रुपये की मांग की है।

समिति ने कहा कि केंद्र, राज्य सरकार की मांग पर गंभीरता से गौर करे और तुरंत मदद मुहैया कराए। राज्य सरकार को भी चाहिए कि वह इस बारे में विस्तृत कार्ययोजना का ब्यौरा केंद्र को भेजे।

समिति ने भूकंप के खतरे से बचाव के लिए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को उत्तराखंड क्षेत्र में नियमित रूप से मॉक ड्रिल करने की सलाह दी है। इसका मकसद यही है कि लोग मानसिक रूप से ऐसी आपदाओं का मुकाबला करने के लिए तैयार हो सकें।

अली वार्निंग सिस्टम समिति ने अर्थ साइंस मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड में भूकंप की पूर्व सूचना के लिए स्थापित अर्ली वार्निग सिस्टम स्थापित किए जाने की सराहना की है। उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर इसके तहत 100 सेंसर लगाए गए हैं, जिन्हें आईआईटी रुड़की में स्थापित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जोड़ा गया है। अगर उत्तराखंड या हिमालयी क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप आता है तो उसकी सूचना यह केंद्र 60-90 सेकेंड पहले दे सकता है।

समिति ने कहा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा इस सिस्टम से सूचना के प्रसार के तंत्र को व्यापक बनाने की दिशा में कार्य हो सके। क्योंकि इससे दिल्ली में भी डेढ़ मिनट पहले सूचना दी जा सकती है। इसके लिए आपदा प्रबंधन एजेंसियों के जरिए एक सूचना तंत्र स्थापित करने की सलाह दी गई है।