वास्तु : ये छोटे और आसान उपाय रोमांस व सेक्स लाइफ को परवान चढ़ाएंगे

आप में से ज्यादातर लोगों को शायद यह अजीब लगे। लेकिन यह सच्चाई है कि वास्तु जितना आपके निवास, आपके रहन-सहन, आपकी सेहत, संपन्नता से संबंधित है, उतना ही गहरा इसका संबंध लव, रोमांस और सेक्स से भी है। सच तो यह है कि बिना रोमांस के जीवन उसी तरह नीरस हो जाता है, जैसे बारिश बिन सावन।

रोमांस किसी भी दंपती के जीवन को ऊर्जामय बनाए रखता है। आज की नारी भी न सिर्फ रोमांस के महत्व को बेहिचक स्वीकार करती है, बल्कि अपने जीवन को प्रेममय बनाने के लिए किसी भी तरह की पहल करने से भी नहीं हिचकिचाती। यही है आज के युग की अनोखी नारी।

मानव जीवन में रोमांस उसी तरह जरूरी है, जिस तरह भोजन में नमक-मिर्च। अधिकांश लोग आज भी प्यार और सेक्स को एक ही समझते हैं यानी कि वे इन दोनों में कोई अंतर नहीं देखते। वास्तविकता यह नहीं है। प्यार और सेक्स में उतना ही बड़ा अंतर है, जितना दिन और रात में। एक-दूसरे से संबंधित होकर भी ये एक-दूजे से अलग हैं।

यह समझना मुश्किल नहीं कि रोमांस का एक गृहस्थ के जीवन में क्या महत्व होता है। आप अगर अपने दांपत्य जीवन को रोमांटिक और अति-सुखद बनाना चाहते हैं, तो वास्तु दिशा-निर्देश इसमें आपकी मदद कर सकते हैं। आइए, जानते हैं कि वास्तु नियमों को अपनाकर हम अपना दांपत्य जीवन कैसे सुखद एवं रोमांटिक बना सकते हैं-

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  • एक शादीशुदा युगल के लिए उनका शयन कक्ष ऐसा स्थान होता है, जहां वे न केवल आत्मीय पल बीताते हैं बल्कि अंतरंग पलों का आनंद भी लेते हैं। वास्तु के अनुसार, विवाहित जोड़े का शयन कक्ष दक्षिण अथवा दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए। इससे उनके बीच स्थायी संबंध कायम होता है।
  • दक्षिण-पूर्व में बना शयन कक्ष संबंधों को उत्तेजक और संतोषप्रद बना देता है। पर चूंकि इस दिशा के प्रतिनिधि देव अग्नि देव हैं, इसलिए पति-पत्नी के बीच हुई छोटी-सी नोक-झोंक भी उनके संबंधों को बिगाड़ सकती है। इसलिए आपका शयन कक्ष अगर दक्षिण-पूर्व में है, तो नोक-झोंक से बचना चाहिए। जितना संभव हो सके, एक-दूसरे के साथ विनम्र बने रहें। इसका एक वैकल्पिक उपाय यह हो सकता है कि आप इस कक्ष को अंतरंग संबंधों के लिए इस्तेमाल करें और शयन किसी अन्य कक्ष में करें।
  • नवदंपती यानी नए शादीशुदा जोड़े का बेडरूम उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाया जा सकता है। यह दिशा वायु देवता की है। इस दिशा में बना शयन कक्ष नवयुगल के बीच उत्पन्न होने वाली कामअग्नी को हवा देगा, यानी उनके संबंधों को और उत्तेजक व सुखमय बना देगा। लेकिन यह ध्यान रखें कि युगल इस दिशा में बने शयन कक्ष को थोड़े समय के लिए ही इस्तेमाल करें, क्योंकि यह दिशा अस्थिरता की दिशा है। लंबे समय तक इस सयन कक्ष का प्रयोग किया जाना उनके संबंध में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
  • शयन कक्ष को रखें आकर्षक और सुस्सजित। दंपती का कमरा साफ-स्वच्छ व इस प्रकार सुस्सजित होना चाहिए कि उन्हें वहां आते ही सुकून व आरामदायक महसूस हो। कमरे में आपके व्यापार या ऑफिस वर्क से जुड़ा कोई भी सामान जैसे कम्प्यूटर या फाइलें आदि नहीं होने चाहिए। ये चीजें आपकी एकाग्रता को बाधित करती हैं।
  • आजकल यह प्रचलन हो गया है कि युगल अपने बेड के सामने बड़ा-सा शीशा लगाने लगे हैं, जिससे वे संबंध बनाते समय खुद को शीशे में देख सकें। ऐसा नहीं करना चाहिए। शयन कक्ष में शीशा नहीं लगाना चाहिए, खासकर बेड के सामने तो बिल्कुल भी नहीं।
  • कुछ लोग बेडरूम के ही कोने में पूजा-स्थल बना लेते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए। अगर यह संभव न हो तो पूजा-स्थल व बेड के बीच लकड़ी या धातु का पार्टिशन लगाकर उसे अलग कर दें।
  • बेडरूम में देवी-देवताओं या परिजनों के फोटो नहीं लगाने चाहिए। इनके स्थान पर प्रेमी युगल या प्रेम व रोमांस को प्रकट करने वाली तस्वीरें दीवारों पर लगाएं। शयन कक्ष में ताजा व खुशबूदार फूलों को रखें।

यह लेख मशहुर वास्तु विशेषज्ञ नरेश सिंगल से बातचीत के आधार पर लिखा गया है। वास्तु से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए नरेश सिंगल से संपर्क करें…

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