IIT रुड़की से निष्कासित छात्रों के समर्थन में संस्थान के अन्य छात्र, क्लास में जाने से इनकार

आईआईटी रुड़की से निकाले गए छात्रों के मामले ने और बड़ा रूप धारण कर लिया है। छात्रों को एकमात्र उम्मीद हाईकोर्ट से थी लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट ने भी संस्‍थान के फैसले को ही सही ठहरा दिया। अब संस्‍थान के ही कुछ छात्र ‌निष्‍कासित छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतर गए हैं।

गुरुवार को संस्‍थान के छात्रों ने कक्षा में आने से मना कर दिया और कक्षा के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान छात्रों ने निष्कासित छात्रों को वापस लेने की मांग की। इस दौरान आईआईटी अधिका‌रियों ने भी छात्रों से धरना वापस लेने की अपील की। इसके साथ ही छात्रों का निष्कासन वापस लेने की मांग के साथ जुलूस भी निकाला गया।

गौरतलब है कि बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने आईआईटी रुड़की के निष्कासित छात्रों में दो को छोड़कर बाकी 64 छात्रों को संस्‍थान से निष्कासित करने का फैसला सही माना था। कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद 64 छात्रों की अर्जियों को खारिज करते हुए आईआईटी रुड़की से निकाले जाने के फैसले को जायज ठहराया था।

साथ ही हाईकोर्ट ने पांच सीजीपीए से ज्यादा नंबर वाले केवल दो छात्रों की याचिका पर संस्थान को निर्देश दिया कि वह उनके प्रार्थना पत्र पर एक हफ्ते के भीतर निर्णय लें। बता दें कि कुल 70 निष्कासित छात्रों में चार छात्रों ने अपने संस्थान के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी थी।

न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष बुधवार को मामले की सुनवाई हुई। आईआईटी रुड़की से निष्कासित छात्र सत्यप्रकाश व अन्य ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें 15 जून 2015 को संस्थान से निकाल दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आईआईटी रुड़की के नियम 33 के अनुसार केवल उन्हीं छात्रों को बाहर किया जा सकता है जो पहले साल के अंत में निर्धारित अर्न क्रेडिट एव सीजीपीए लाने में असफल रहते हैं जबकि उनका अर्न क्रेडिट निर्धारित 22 अंक से ज्यादा है। इसलिए उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं किया जा सकता है।

आईआईटी रुड़की के वकील विपुल शर्मा ने कोर्ट में तर्क रखा कि नियम के अनुसार केवल उन्हीं विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा जो अर्न क्रेडिट एवं सीजीपीए लाता है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान दो छात्र अनुराग मेमरोट व मोहम्मद सैफ अनवर के वकील की ओर से बताया गया कि उनका सीजीपीए निर्धारित मानदंड के अनुरूप है।

सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दोनों छात्रों के मामले में संबंधित संस्थान को एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है। इसके अलावा बाकी 64 विद्यार्थियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए आईआईटी से निकाले जाने के फैसले को सही ठहराया है।