अल्मोड़ा जिले के खूबसूरत रानीखेत में माल रोड पर घने जंगल के बीच सुरम्य स्थल पर स्थित मां झूला देवी का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि मां झूला देवी का आशीर्वाद कई लोगों के लिए बेहतर फलीभूत हुआ है।

माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना करीब 700 साल पहले हुई थी। मंदिर में लटकी असंख्य घंटियां अटूट आस्था को बयां करती हैं। करीब 700 साल पहले चौबटिया क्षेत्र के घनघोर जंगल में बड़ी संख्या में जंगली जानवरों का वास था। उस दौर में क्षेत्र के ग्रामीण इन जानवरों के आतंक से बेहद दुखी थे।

RanikhetJhulaDevi

ग्रामीणों व उनके मवेशियों पर आए दिन हमला होने लगे। इससे दुखी लोगों ने मां की भक्ति की। इस भक्ति से खुश होकर देवी मां ने पिलखोली निवासी एक व्यक्ति को सपने में दर्शन दिए और दबी मूर्ति के बारे में बताया। उस जगह खुदाई में ग्रामीणों को आकर्षक मूर्ति मिली। उसी स्थान पर मां का मंदिर बना कर मूर्ति स्थापित की गई।

कहते हैं कि जब से पूजा-अर्चना शुरू हुई, तो जंगली जानवरों के आतंक से ग्रामीण मुक्त हो गए। झूले के पीछे मान्यता है कि एक बार सावन के महीने में मां ने एक व्यक्ति को फिर स्वप्न में बच्चों की भांति झूले में झूलने की इच्छा जताई। तो ग्रामीणों ने एक झूला तैयार कर मां की मूर्ति उस में स्थापित कर दी।

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तभी से मंदिर झूला देवी के नाम से विख्यात हो गया। मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि मंदिर लगभग 14वीं सदी का है और मंदिर से सन् 1959 में चोरी हुई मूर्ति का आज तक पता नहीं चला है। मान्यता है कि मंदिर में तन-मन से पूजा अर्चना के साथ मन्नत मांगने से हर मुराद पूरी होती है।

असंख्य घंटियां श्रद्धालुओं की आस्था को बयां करती हैं। यह घंटियां मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा मन्नत पूरी होने पर चढ़ाई जाती हैं। रानीखेत शहर से करीब 7 किमी की दूरी पर स्थित यह एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। यह हिंदू देवी दुर्गा को समर्पित है। चैत्र नवरात्र में मंदिर में विशेष अनुष्ठान होता है।