अल्मोड़ा जिले में भी एक पहाड़ ने उत्तरकाशी के वरुणावत की शक्ल अख्तियार कर ली है। यहां कि अतिसंवेदनशील कनवाड़ी की पहाड़ी से होने वाले भूस्खलन को रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी।

खबरों के मुताबिक वैष्णो देवी पहाड़ की ही तरह कहर बरपाने पर आमादा इस खतरनाक भूभाग पर हाई टैक्सल स्टील वायरक्रेट (स्टील का जाल) बिछाया जाएगा, ताकि लगातार खिसक रही पहाड़ी से गिरने वाले बोल्डरों को हाईवे पर गिरने से रोका जा सके। मुख्यमंत्री के निर्देश पर हाई पॉवर कमेटी (एचपीसी) ने सुरक्षात्मक कार्यों के लिए 7.05 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं।

खैरना-रानीखेत स्टेट हाईवे के लिए भुजान के पास अतिसंवेदनशील कनवाड़ी की पहाड़ी खतरा बन चुकी है। सदियों पुराने भूस्खलन व भूगर्भीय हलचल से अस्तित्व में आया यह भूभाग 2010 की भीषण आपदा के बाद से लगातार दरक रहा है। अब स्वयं मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पर संज्ञान लिया है।

मुख्यमंत्री ने नए सिरे से भूगर्भीय सर्वे, जरूरत पड़ने पर स्टेट हाईवे का रूट बदलने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विभागीय अफसरों से एचपीसी को तत्काल प्रस्ताव भेजने को कहा गया है, ताकि बजट मिलते ही सुरक्षात्मक कार्य शुरू कराए जा सकें।

वैष्णो देवी की पहाड़ी की तर्ज पर स्टील का जाल बिछा कर पहाड़ी का खतरा टालने की तैयारी कर ली गई है। टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) की डीपीआर सौंपने के बाद एचपीसी ने 7.05 करोड़ मंजूर कर दिए हैं। बहुत जल्द विशेषज्ञों का दल सुरक्षात्मक कार्य शुरू करा देगा।

ऐसे होगा जोखिम कम

  • 350 मी. लंबे दायरे में तीन जोन में होंगे सुरक्षात्मक कार्य
  • कोसी तट से स्टेट हाईवे व 40-50 मी. की ऊंचाई पर क्रोनिक जोन तक उपचार
  • पहाड़ी पर नए बने नालों को कवर करता स्टील जाल थामेगा कहर
  • कंक्रीट फील्ड व रिटेनिंग वॉल देगी मजबूती