नैनीताल की ठंडी वादियों से तय होगी मोदी सरकार की दिशा, मंगलवार से संघ की बैठक

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर एक ओर सरकार अपनी बात पर अड़ी है तो दूसरी तरफ विपक्ष में विरोध में ताल ठोककर खड़ा है और टस से मस होने को तैयार नहीं है। इसके अलावा विपक्षी दल व्यापमं और ललितगेट पर भी मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष की रणनीति से निपटने के लिए ठंडे दिमाग से सोचने की जरूरत है, शायद इसी लिए इस बार रणनीति बनाने के लिए नैनीताल को चुना गया है।

सरकार विरोधी अभियान सहित मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाला, पूर्व आइपीएल गवर्नर ललित मोदी के खुलासों से उपजे हालात से किस तरह निपटा जाए और इन तमाम चुनौतियों के बीच संघ का काम कैसे बढ़े, इसकी रणनीति इस बार नैनीताल में बनेगी। बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के सियासी भविष्य पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

विपक्षी दल खासकर कांग्रेस व वामदल केंद्र की मोदी सरकार पर आरएसएस के एजेंडे पर काम करने व सरकार का रिमोट कंट्रोल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुख्यालय नागपुर में होने का आरोप लगाते रहे है। केंद्र में मोदी सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद संघ के अनुषांगिक संगठन श्रम सुधार समेत अनेक मुद्दों पर सरकार के रवैये को लेकर नाखुशी जता चुके हैं।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से गठबंधन के बाद बीजेपी की धारा-370 को लेकर नरमी से आरएसएस से जुड़ें संगठनों में नाराजगी है। जल्द ही बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, इस चुनाव में संघ की भूमिका क्या रहेगी, इसको लेकर रणनीति का खुलासा फिलहाल नहीं हो पाया है। इसके अलावा तमाम आनुषांगिक संगठन किन मुद्दों पर काम करेंगे, यह भी बैठक की चर्चा का अहम विषय हो सकता है।

नैनीताल शहर से करीब तीन किमी पैदल व सड़क मार्ग से 18 किमी दूर विद्या भारती से संबद्ध पार्वती प्रेमा जगाती विद्यालय सरस्वती विहार में पहली बार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व आनुषांगिक संगठनों के केंद्रीय पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक 21 से 24 जुलाई तक तय है।

बैठक में हिस्सा लेने के लिए संघ के केंद्रीय पदाधिकारियों का पहुंचना शुरू हो चुका है। बैठक के लिए पार्वती प्रेमा जगाती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय परिसर में खास इंतजाम किए गए हैं। व्यवस्थाओं में करीब सौ पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बैठक में सरसंघ चालक मोहन भागवत, अखिल भारतीय सर कार्यवाहक भैय्या जी जोशी, सहकार्यवाहक कृष्ण गोपाल, एमजी वैद्य के अलावा संघ के आनुषांगिक संगठनों के संगठन मंत्री, प्रांत प्रचारक व इससे ऊपर स्तर के करीब दो सौ अधिकारी शामिल होंगे। पहली बार शीर्ष स्तर की बैठक नैनीताल में किए जाने से राज्य व स्थानीय संघ के पदाधिकारी बेहद उत्साहित हैं।

संघ के केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक में 2017 में उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में भूमिका पर भी चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है। संघ के आनुषांगिक संगठनों ने राज्य में आई आपदा में बड़े स्तर पर राहत केंद्रों का संचालन किया। राज्य में अगले साल 25 लाख पौधों के रोपण की भी योजना है।