कांवड़ मेले में प्रतिबंधित रहेंगेे त्रिशूल-तलवार, संत समाज ने इसे बताया हिंदुओं का अपमान

कांवड़ मेले की शुरुआत एक अगस्‍त से होने जा रही है। मेले में इस बार त्रिशूल, तलवार और हॉकी-डंडे पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। कांवड़ मेले की तैयारियों को लेकर हुई बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि इस बार डीजे पर भी पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। साथ ही सभी कांवड़ियों के लिए स्थानीय स्तर पर आईडी कार्ड बनाने का भी निर्णय लिया गया।

इसके अलावा कांवड़ यात्रा जिन-जिन राज्यों से होकर गुजरती है, वहां डाक कांवड़ पर ट्रैफिक पुलिस की पैनी नजर रहेगी। नियम तोड़ने वाले कांवड़ियों का चालान होगा।

हालांकि, संत समाज द्वारा त्रिशूल पर प्रतिबंध लगाए जाने का विरोध किया जा रहा है। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने कहा कि इससे करोड़ों हिंदुओं का अपमान होगा।

उन्होंने कहा कि त्रिशूल भगवान शंकर का प्रतीकात्मक रूप है और इस पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं है अौर अखाड़ा परिषद इसका विरोध करेगी। बैठक में कांवड़ मेले के समय, आपसी तालमेल बैठाने के प्रयास के अलावा हरिद्वार में एक कंट्रोल रूम बनाने पर फैसला हुआ।

कंट्रोल रूम में उत्तराखंड के साथ-साथ अन्य प्रदेशों के अधिकारी भी बैठेंगे, जिससे कि कांवड़ियों की संख्या पर आपस में सभी राज्यों में तालमेल बैठ सके। इससे किसी भी घटना पर तुरंत प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। बैठक में गढ़वाल कमिश्नर और आईजी ने भी शिरकत की।