हमारे पुरखों ने बरसों पहले ‘हरेला’ की शुरुआत कर ‘ग्रीन थिंकिंग’ की शुरुआत कर दी थी : CM

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि पूरी दुनिया में ‘ग्रीन थिंकिग और ग्रीन एक्शन’ की बात आज की जा रही है, लेकिन हमारे पुरखों ने प्रकृति का अभिनंदन करने की परंपरा बरसों पहले हरेला पर्व (सावन में जौ बोने की) शुरुआत कर दी थी।

राज्य में मनाये जा रहे हरेला पर्व पर अपने आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आज पूरी दुनिया में ग्रीन थिंकिंग व ग्रीन एक्शन की बात कर रही है लेकिन हमारे पुरखों ने तो बरसों पहले हरेला के जरिये प्रकृति की वंदना के पर्व मनाने की परम्परा प्रारम्भ कर दी थी।’

रावत ने कहा, ‘हरेला एवं झुमेलो (इस मौके पर किये जाने वाले नृत्य) के माध्यम से प्रकृति का अभिनंदन करने की परम्परा प्रारम्भ करना हमारे पूर्वजों की भविष्योन्मुखी सोच को दर्शाता है और हमने भी इसको आगे बढ़ाते हुए हरेला को ‘मेरा पेड़ मेरा धन’ योजना से जोड़ते हुए प्रकृति संरक्षण को सांस्कृतिक अभियान के तौर आगे बढ़ाया है।’

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पहल को लोगों ने खुद अभियान के रूप में लिया है और पूरे राज्य में लोगों में पेड़ लगाने का उत्साह दिख रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण का यह सबसे बड़ा नागरिक अभियान है और इसमें सरकार सिर्फ मददकर्ता की भूमिका में है।

रावत ने कहा कि हमारा यह अभियान केवल पेड़ लगाने का ही नहीं है बल्कि इसका आर्थिक व स्वास्थ्य पक्ष भी है। ‘मेरा पेड़ मेरा धन’ योजना में हम उन पेड़ों को लगाने के लिए प्रोत्साहन राशि दे रहे हैं जो लोगों की आजीविका से जुड़े हों।

महिलाओं में लौह तथा आयोडीन की कमी और पशुओं के लिए चारा की अनुपलब्धता को ग्रामीण क्षेत्रों की दो प्रमुख समस्याएं बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को इसके लिए चारा प्रजाति के पेड़ लगाने के साथ ही विशेष रूप से अपने घरों में अमरूद व आंवला के पेड़ भी लगाने चाहिए।

रावत ने हरेला के पावन पर्व पर कई जगह वृक्षारोपण भी किया।