काशीपुर की जमीन में दबा है उत्तराखंड को ‘तबाह’ करने का सामान

उत्तराखंड में तराई क्षेत्र के उधमसिंह नगर जिले में काशीपुर के पतरामपुर इलाके में पिछले 11 सालों से 555 मिसाइलें दफन हैं। अगर ये मिसाइलें फट गईं तो इलाके में बड़ी तबाही मच सकती है।

प्रशासन ने तबाही के इस सामान को निष्क्रिय करने के लिए सार्थक प्रयास नहीं किया, मिसाइल निष्क्रिय करने की फाइल पिछले 11 साल से ही अफसरों के दफ्तरों में चक्कर काट रही है। मिसाइलें दबे होने से इलाके के लोग खौफजदा हैं।

काशीपुर स्थित एसजी स्टील फैक्ट्री में स्क्रैप को गलाते समय 21 दिसंबर 2004 को जबर्दस्त विस्फोट के साथ मिसाइल फट गई थी। उस हादसे में वहां काम कर रहे एक श्रमिक के चिथड़े उड़ गए थे। मिसाइल आवास-विकास कॉलोनी में एक मकान पर जाकर गिरी जिससे मकान की दीवार ढह गई थी।

मिसाइल गिरने से आसपास के मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद जांच में पता चला कि मौत का यह सामान आईडीसी तुगलकाबाद से स्क्रैप की खेप के रूप में आया था। प्रशासन ने तब फैक्ट्री में 555 जिंदा मिसाइलें बरामद की थीं।

रातोंरात पतरामपुर पुलिस चौकी पास गहरे गड्ढे में इन्हें दफन कर दिया गया। हिफाजत के लिए गारद भी तैनात कर दी थी। नेशनल सिक्योरिटी ऑपरेशन एंड ट्रेनिंग नई दिल्ली और पुलिस स्पेशल ब्रांच नानापुर (महाराष्ट्र) की टीमों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण कर मिसाइलों को शीघ्र नष्ट करने की सलाह दी थी।

साल 2007 में इन्हें निष्क्रिय करने के लिए प्रशासन ने 2.52 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। एनएसजी की टीम ने फीका नदी को निर्जन वन क्षेत्र में निष्क्रिय करने के लिए चुना था। लेकिन किन्हीं कारणों से इसे निष्क्रिय नहीं किया जा सका।

उधर, 12 जुलाई को पतरामपुर पुलिस चौकी के लोकार्पण के समय क्षेत्रवासियों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीलेश आनंद भरणे से पतरामपुर क्षेत्रवासियों से फिर से मिसाइलें कहीं अन्य शिफ्ट करने अथवा निष्क्रिय करने की मांग की। एसएसपी भरणे ने मिसाइलें दबे वाले स्थान का निरीक्षण किया और मिसाइलों को शीघ्र निष्क्रिय कराए जाने की आश्वासन दिया है।