नैनीताल हाईकोर्ट का आदेश – आज परीक्षा में बैठ पाएंगे IIT से निकाले गए 72 छात्र

आईआईटी रुड़की से निकाले गए 72 छात्रों के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने कहा है कि जो अभ्यर्थी गुरुवार को होने वाली परीक्षा में बैठना चाहते हैं, उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाए। गौरतलब है कि आईआईटी रुड़की के 73 छात्रों को फर्स्ट ईयर के दो सेमेस्टर में औसत पांच सीजीपीए से कम नंबर लाने पर संस्थान से निकाल दिया था, हालांकि बाद में एक छात्र का निष्कासन रद्द कर दिया गया था।

हाईकोर्ट ने आईआईटी रुड़की को 20 जुलाई से पहले जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल अंतरिम आदेश है, जिसका केस के गुण-दोष और अंतिम सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के सामने बुधवार को मामले की सुनवाई हुई। आईआईटी रुड़की के छात्र अरविंद मीणा सहित अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि वह आईआईटी रुड़की से बीटेक कर रहे हैं। 15 जून 2015 को संस्थान ने 73 छात्रों को फर्स्ट ईयर के सेमेस्टर दो में औसत पांच सीजीपीए से कम नंबर लाने पर संस्थान से निकाल दिया था।

याचिकाकर्ता का कहना था कि 2014 के अध्यादेश के पैरा 33 के अनुसार उन्हीं विद्यार्थियों को बाहर किया जा सकता है जो पहले साल के अंत में निर्धारित अर्न क्रेडिट एवं सीजीपीए लाने में असफल रहते हैं। याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना था कि इनका अर्न क्रेडिट निर्धारित 22 अंक से ज्यादा है। ऐसे में उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं किया जा सकता है।

उधर आईआईटी रुड़की की ओर से बताया गया था कि उन्हीं विद्यार्थियों को प्रवेश देंगे जो अर्न क्रेडिट एवं निर्धारित सीजीपीए लाता है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने व्यवस्था दी कि जो अभ्यर्थी गुरुवार को होने वाली परीक्षा में बैठना चाहते हैं उन्हें परीक्षा में बैठने दें।

आईआईटी रुड़की ने फर्स्ट ईयर के सेमेस्टर दो में पांच सीजीपीए से कम अंक पाने वाले 72 छात्रों को संस्थान से निकाल दिया था। आठ जुलाई को हुई सीनेट की बैठक में मर्सी अपील पर सुनवाई के दौरान पूर्व में लिए गए निर्णय को सही ठहराते हुए बनाए रखा गया। इस फैसले के खिलाफ छात्रों ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी।

गौरतलब है कि बाद में एक छात्र को आईआईटी ने संस्थान में वापस ले लिया था, जिससे निष्कासित छात्रों की संख्या 72 रह गई।