…तो क्या गंगा को गंदा करने पर मौत की सजा मिलेगी?

जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा, गंगा को मैला करने पर मिले कठोर सजा

देहरादून : जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज का कहना है कि गंगा नदी को प्रदूषित करने वाले आश्रमों के मठाधीशों और उद्योगपतियों पर गंगा की हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, गंगा में गंदगी को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाकर इसके लिए कानून बनाने की जरूरत है।

जगद्गुरु शंकराचार्य मंगलवार को ‘नमामि गंगे’ स्वच्छता अभियान के तहत नगर निगम में प्रभावी सफाई व्यवस्था पर टाउन हाल में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। उन्होंने कहा कि गंगा आस्था का ही नहीं विज्ञान का भी विषय है। कहा कि लोकतंत्र की आड़ में कुछ लोग उदंड हो गए हैं।

इन लोगों में भय खत्म हो गया है। गंगा को प्रदूषित करने वाले भी ऐसे ही लोग हैं। तमाम औद्योगिक इकाइयों और आश्रमों से सीवरेज सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहे हैं। गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान के लिए जरूरी है कि ऐसा अपराध करने वालों पर शिकंजा कसने को सख्त कानून बनाया जाए।

इससे पहले नमामि गंगे समिति के सदस्य और पूर्व मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए हर नागरिक को सोचना होगा। तभी यह अभियान सफल हो पाएगा। पर्यावरणविद पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी, टपकेश्वर महादेव के स्वामी कृष्णा गिरी और कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगाई ने प्लास्टिक, तस्वीरों के साथ कांच के फ्रेम और बोतलें आदि गंगा में प्रवाहित न करने पर जोर दिया।

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे मेयर विनोद चमोली ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए नगर निगम क्षेत्र में भी स्वच्छता और नदियों की स्वच्छता पर सभी से सहयोग की अपील की। इस मौके पर एमएनए नितिन भदौरिया, प्रबुद्ध समाज के अध्यक्ष पंडित उदयशंकर भट्ट, पार्षद और अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

नमामि गंगे समिति के सदस्य त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शव गंगा में प्रवाहित करने के बजाय विद्युत शवदाह गृह बनाए जाने की आवश्यकता बताई। वहीं, जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज कहा कि जलसमाधि से गंगा प्रदूषित नहीं होती है। शव को कुछ समय बाद मछलियां और अन्य जीव जंतु खा लेते हैं।

सिर्फ हड्डियां बचती हैं, जिसमें कैल्शियम होता है। कैल्शियम से गंगा को नुकसान नहीं होता है। पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. बृजमोहन शर्मा ने कहा कि आज के दौर में मनुष्य में रसायनों और दवाइयों का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। शव में भी यह खतरनाक केमिकल रह जाते हैं। ऐसे में शवों को गंगा में बहाना खतरनाक है।