IIT रुड़की से छात्रों को निकाले जाने के खिलाफ आज हाईकोर्ट में हो सकती है सुनवाई

आईआईटी रुड़की से निकाले गए 72 छात्रों का निष्कासन रद्द करने की मांग को लेकर मंगलवार को बीजेपी की छात्र इकाई एबीवीपी ने संस्‍थान के कैंपस में जमकर तोड़-फोड़ की। इस बीच छात्रों को संस्थान से निकालने का मामला हाईकोर्ट भी पहुंच गया। इस मामले पर आज नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है।

देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्‍थान के किसी भी कैंपस में तोड़-फोड़ की संभवतः यह पहली घटना है। मौके पर पुलिस बलों को तैनात करना पड़ा।

संस्थान से निष्कासित किए गए छात्रों के समर्थन में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी उतर आया है। निकाले गए छात्रों को वापस लेने की मांग को लेकर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल जारी है। इससे पहले निकाले गए छात्रों को वापस लेने की मांग को लेकर सोमवार को भी एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आईआईटी गेट पर प्रदर्शन किया था।

आईआईटी परिसर में प्रवेश करने को लेकर उनकी पुलिस ने तीखी नोकझोंक भी हुई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। जिस पर कार्यकर्ता गेट पर ही धरने पर बैठ गए।

सोमवार को एबीवीपी कार्यकर्ता आईआईटी गेट पर पहुंचे। उन्होंने आईआईटी डायरेक्टर से मिलने की मांग की, लेकिन आईआईटी प्रशासन ने समय नहीं दिया। इस पर कार्यकर्ताओं ने आईआईटी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

संगठन के गढ़वाल संभाग प्रमुख गौरव शर्मा ने कहा कि आईआईटी ने 72 छात्रों को निकालकर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आईआईटी प्रशासन से निकाले गए सभी छात्रों को वापस लेने और सीनेट को भंग करने की मांग की।

संगठन के जिला प्रमुख गोविंद सिंह कुमराड़ा ने कहा कि जब तक छात्रों को इंसाफ नहीं मिल जाता है तब तक संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को निकाला जाना अन्याय है।

दरअसल आईआईटी रुड़की ने बीटेक फर्स्ट ईयर में 5 सीजीपीए से कम अंक आने पर 73 छात्रों को संस्थान से निकाल दिया था। बाद में एक छात्र को संस्थान ने वापस ले लिया था। जिसके बाद निष्कासित छात्रों की संख्या 72 रह गई है।

मामला हाईकोर्ट पहुंचा
इस बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से 72 छात्रों को निकाले जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है। आइआइटी रुड़की के छात्र शुभम व अन्य की ओर से याचिका दायर कर कहा गया है कि वह संस्थान में बीटेक का कोर्स कर रहे हैं। बीटेक कोर्स चार साल का है। हर साल दो सेमस्टर होते हैं। 15 जून को सीजीपीए कम होने पर संस्थान द्वारा 72 छात्रों को दूसरे साल में दाखिला देने से इनकार कर दिया। इस आदेश को याचिका के जरिये हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।