अब प्रवेश परीक्षा में 6 फीसदी अंक पाने वालों को भी मिलेगा IIT में दाखिला

देश के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्‍थान आईआईटी प्रवेश परीक्षा में इस बार आरक्षित वर्ग के छात्रों का 6 फीसदी नंबर लाने पर भी दाखिला हो जाएगा। इन दिनों आईआईटी अपने स्तर को बचाने के लिए जूझ रहा है। हाल ही में निचले स्तर के प्रदर्शन के कारण आईआईटी रुड़की ने अपने 73 छात्रों को संस्थान से निकाल दिया था।

और अब लगता है कि देश के आईआईटी संस्थान में कमज़ोर वर्ग से आने वाले छात्रों को कुछ छूट दी जा सकती है। कमजोर वर्ग से मतलब यहां आरक्षित वर्ग के छात्रों से है। आरक्षित वर्ग को ध्यान में रखते हुए आईआईटी संस्थान इस बार 504 नंबरों में 31 (6.1%) नंबर हासिल करने वाले छात्र को भी संस्‍थान में प्रवेश दे रही हैं। 2014 में ये फीसदी 8.8% था।

जेईई एडवांस 2015 के परीक्षा प्रश्न पत्रों में सब्जेक्टिव प्रश्न और निगेटिव मार्किंग के चलते परीक्षा बेहद कठिन हो गई थी। इस कारण आईआईटी ने क्वालिफाइंग कटऑफ 35 फीसदी से 24.5 प्रतिशत कर दी है। इसी तरह आरक्षित श्रेणी के लिए यह कटऑफ 12.25 फीसदी कर दी गई है।

कम कटऑफ रखने के बाद भी आईआईटी इन कैटेगरी में सारी सीटें भरने में नाकाम रही। इसलिए अब क्वालिफाइंग नंबर कम करके एक और कैटेगरी बनाई गई है। जिसमें 6.1 फीसदी नंबर लाने वाले छात्रों को एक शुरुआती कोर्स के तहत दाखिला दिया जाएगा।

अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सीट अलॉट होने के पहले राउंड के बाद 591 सीट खाली रह गई थीं। अधिकारियों के अनुसार, इसमें से ज्यादातर सीट एसटी और शारीरिक तौर पर अक्षम लोगों के लिए आरक्षित हैं।

इस बारे में आईआईटी डायरेक्टर का कहना है कि सीटों की अंतिम स्थिति तीसरे राउंड के बाद पता चलेगी। आईआईटी को संवैधानिक आरक्षण का पालन करना पड़ता है। हमारे संस्‍थानों में सीटें खाली नहीं रखी जा सकतीं। सरकार को 12वीं के शिक्षा के स्तर में सुधार लाना चाहिए।’

संस्‍थान में एडमिशन के लिए अपनाए गए फॉर्मूले से इस साल आईआईटी के संस्‍थान 180 ऐसे छात्रों को प्रवेश दे चुके हैं, जिनके अंक प्रवेश परीक्षा में 31 से 62 के बीच थे। संस्‍थान द्वारा चलाये जा रहे 18 प्रिपरेटरी प्रोग्राम में ये संख्या तिगुनी हो सकती है।

प्रिपरेटरी प्रोग्राम में शामिल होने वाले छात्रों को एक साल की ट्रेनिंग के बाद बी-टेक में प्रवेश दिया जाता है। प्रिपरेटरी प्रोग्राम आरक्षण का लाभ लेकर आए ऐसे छात्रों के लिए चलाया जाता है जो एंट्रेंस की कट ऑफ़ लिस्ट में स्थान नहीं पा पाते। एक अन्य प्रोफेसर के अनुसार कम एंट्रेंस कट ऑफ का कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आए ऐसे छात्र हैं जो शहर के बच्चों की तुलना में काबिलियत में कम होते हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि शहर का छात्र कोचिंग कर के बेसिक एजुकेशन के गैप को भर लेता है जबकि ग्रामीण क्षेत्र का बच्चा कोचिंग के अभाव में ऐसा नहीं कर पता। इसलिए आईआईटी के स्तर में गिरावट आ रही हैं। प्रोफेसर ने कहा कि आरक्षण से आए छात्रों में इस कमी को स्कूलिंग के दौरान अच्छी शिक्षा से दूर किया जा सकता है।

आईआईटी में प्रवेश के लिए क्वालिफाइंग नंबर की सीमा कम होने के बाद भी 31 ऐसे छात्रों को जो जेईई एडवांस में पास हो गए थे और जिन्हें आईआईटी में प्रवेश मिलना था को इसलिए प्रवेश नहीं दिया गया क्योंकि वो 12वीं में अपने बोर्ड में टॉप 20% में शामिल नहीं थे या उनके 75% नंबर 12वीं में नहीं थे। आईआईटी में प्रवेश के लिए ये सीमा जरूरी हैं। पिछले साल इसी कारण 240 छात्रों को आईआईटी में प्रवेश नहीं दिया गया था।