नैनीताल में इस साल आ सकती थी तबाही, ‘अंग्रेजों के काम’ ने बचाया

पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के बात नैनीताल की मशहूर मालरोड मलबा रोड में तब्दील हो गई। इसी के साथ एक बार फिर अंग्रेजों के समय बना ड्रेनेज सिस्टम चर्चा में आ गया है। लोगों का कहना है कि अगर नैनीताल हाई कोर्ट ने पिछले दिनों इंडिया होटल और एवरेस्ट होटल के बीच के नाले को न खुलवाया होता, तो ये दोनों होटल तबाह हो गए होते। बता दें कि ये नाला अंग्रेजों ने ही बनवाया था।

खास बात ये है कि इन होटलों में कई देश-विदेश के पर्यटक ठहरे हुए थे। नैनीताल की विधायक सरिता आर्य ने हाई कोर्ट को इस काम के लिए धन्यवाद भी दिया है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट की दूरदर्शिता की वजह से भारी नुकसान होने से बच गया। नैनीताल में 4-5 जुलाई को 24 घंटे के भीतर 400 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जिससे भारी तबाही मच सकती थी।

अंग्रेजों ने उस समय नैनीताल शहर की सुरक्षा के लिए 79 किलोमीटर लम्बे नालों का निर्माण कराया था। इनके रखरखाव के लिए हिल साइट सेफ्टी कमिटी गठित भी की गई थी। अंग्रेजों ने ही सुरक्षा के लिहाज से शहर को तीन क्षेत्रों में बांटा था, लेकिन देश की आजादी के बाद इसे भुला दिया गया।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल की दुर्दशा को देखते हुए शहर के इतिहासकार व पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत ने साल 2012 में नालों के अतिक्रमण व तमाम समस्याओं पर ध्यान दिलाने के लिए हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने नालों को फिर से जीवित करवाया। इसका ही नतीजा रहा कि 5 जुलाई की बारिश का असर शहर ज्यादा नहीं पड़ा।