सितारगंज : फैक्ट्री में धमाके से 9 श्रमिक झुलसे, दो की हालत गंभीर

उत्तराखंड के सितारगंज में सिडकुल की एक फैक्ट्री में जोरदार धमाके के साथ बेकिंग ओवन का बर्नर फटने से आग लग गई। ओवन की गरम गैस से 9 श्रमिक झुलस गए, जबकि धमाके से फैक्ट्री के प्लांट के ऊपर का टीनशेड भी उड़ गया। हादसे में झुलसे 9 श्रमिकों में से दो की हालत की गंभीर बताई जा रही है।

घायलों में पांच का हल्द्वानी के बृजलाल अस्पताल और चार का सितारगंज के ही रतूड़ी अस्पताल में इलाज चल रहा है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। बुधवार सुबह करीब 10 बजे सिडकुल की सुरिन ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड में पेंट पकाने के प्लांट में धमाके के साथ बेकिंग ओवन का बर्नर फट गया था।

राज्य में तराई क्षेत्र के उधमसिंह नगर जिले के सितारगंज स्थित इस फैक्ट्री के ओवन से निकली गरम गैस की चपेट में आने से ठाकुरद्वारा निवासी नबल (24) पुत्र भगवान दास और नवाबगंज जिला बरेली उत्तर प्रदेश निवासी महेंद्रपाल सिंह (34) गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को फैक्ट्री की गाड़ी से हल्द्वानी के बृजपाल अस्पताल ले जाया गया।

इनके अलावा हादसे में पंडरी निवासी आमिर (22) पुत्र इरशाद अहमद, विपिन (27) पुत्र नाथूजी, माधोपुर पीलीभीत (यूपी) निवासी रमेश चंद्र (40) पुत्र नारायण लाल, अजीतपुर बरा निवासी नेतराम (32) पुत्र मुरारी लाल, ग्राम ढेमा बदलापुर जिला जौनपुर (यूपी) निवासी सुनील (18) पुत्र स्व. चिंतामणि, ग्राम पंडरी थाना न्यूरिया जिला पीलीभीत (यूपी) निवासी अशोक (22) पुत्र बिहारी लाल व बाईपास कॉलोनी निवासी शायरा खातून (40) पत्नी अलाउद्दीन को रतूड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

यहां डॉक्टरों ने आमिर, सुनील और रमेश की गंभीर स्थिति को देखकर उन्हें भी हल्द्वानी के बृजलाल अस्पताल रेफर कर दिया, जहां नबल और महेंद्रपाल सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा पुलिस को हादसे की सूचना न देने पर करीब एक घंटा देरी से सिडकुल चौकी इंचार्ज योगेश दत्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्लांट हेड एनके अग्रवाल से घटना की जानकारी ली। प्लांट हेड एनके अग्रवाल ने बताया कि हादसे की जांच कराई जाएगी।

हादसे का कारण डिजाइन फेलियर है या फिर कोई तकनीकी कमी हो सकती है। जांच के बाद दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि घायलों का पूरा इलाज फैक्ट्री प्रबंधन कराएगा। इधर, एसडीएम भगत सिंह फोनिया ने भी फैक्ट्री पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और बाद में घायलों का हाल जाना।