‘मुर्दे से कराया मनरेगा का काम’, बैंक खाते में दिहाड़ी भी ट्रांस्फर

रुद्रपुर।… कहावत है कि पुलिसवालों की ‘थर्ड डिग्री’ के सामने तो मुर्दे भी सच उगल देते हैं। लेकिन मनरेगा के ठेकेदार और इसके तहत कार्य कराने वाले सरकारी महकमे तो पुलिस की थर्ड डिग्री से भी आगे निकल गए हैं। आलम ये है कि मनरेगा के तहत मुर्दों से काम कराया जा रहा है।

साफ है कि यह रोजगार गारंटी योजना कुछ लोगों के लिए अंधी कमाई का जरिया बन गया है। धांधली का आलम यह है कि रुद्रपुर में एक मुर्दे को ही मजदूर दिखाकर काम करा दिया गया। यही नहीं एक ऐसे व्यक्ति को भी मजदूर दिखाया गया, जिसने काम ही नहीं किया। मामले का खुलासा होने से सरकारी महकमों में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है।

रुद्रपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत बरी में मनरेगा में एक मृतक महिला से दिहाड़ी काम कराने का मामला उजागर हुआ है। मनरेगा के कार्यों को लेकर मिल रही ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम पंकज पांडेय ने जांच का जिम्मा सीडीओ ईवा आशीष श्रीवास्तव को सौंपा है। सीडीओ ने जब जांच की तो चौंकाने वाली धांधली सामने आई।

सीडीओ ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक़ गांव की महिला फूलो देवी पत्नी शीशपाल का इंदिरा आवास योजना में आवास का निर्माण हुआ। इसमें 17 से 23 फरवरी व 4 मार्च से 11 मार्च 2015 तक मस्टररोल में प्रेमवती पत्नी भूपराम की उपस्थिति दर्ज है। जबकि, प्रेमवती की मौत पहले ही हो चुकी है।

मृतका के बैंक खाते में मनरेगा से 2028 रुपये भेजे गए थे। हालांकि शिकायत के बाद मनरेगा खाते में धनराशि वापस कर दी गई। इसके अलावा जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि नोनी राम पुत्र तानुसूरत ने व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण कराया तो मनरेगा के मस्टररोल में झम्मन लाल की 17 से 23 मार्च 2015 तक उपस्थिति दर्ज है।

हालांकि झम्मन ने कोई काम ही नहीं किया है। झम्मन के खाते में 1872 रुपये मनरेगा से भेजे गए हैं। ख़ास बात यह है कि मस्टररोल में रोजगार सेवक, प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी के हस्ताक्षर हैं।

जांच में गड़बड़ी मिलने पर सीडीओ ने ग्राम विकास अधिकारी वासुदेव सिंह को एक माह के लिए विकासखंड में संबद्ध कर दिया। रोजगार सेवक व ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ जिला विकास अधिकारी आरसी तिवारी व प्रधान के खिलाफ जिला पंचायत राज अधिकारी आरसी त्रिपाठी कार्रवाई करेंगे।