नैनीताल।… उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के वनों में पहली बार अत्यंत दुर्लभ माने जाने वाले हिम तेंदुए की तस्वीर कैमरा टेप में कैद हुई है जिससे राज्य के वन विभाग के साथ ही वन्यजीव प्रेमियों में भी खुशी की लहर है। कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक डॉ. राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि वन विभाग की टीम ने वन्यजीवों की गणना के उद्देश्य से उच्च अल्पाइन और बर्फीले क्षेत्रों में कैमरा टैप लगाए थे जिसमें से एक में दुर्लभत्तम हिम तेंदुए की तस्वीर बीते 29 जून को कैद हो गई।

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उन्होंने बताया कि कुमाऊं क्षेत्र के उंचाई वाले स्थानों में हिम तेंदुओं की मौजूदगी की बात पहले से मानी जाती रही है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हुई है। वन अधिकारी ने बताया कि जिस कैमरा टैप में हिम तेंदुआ का चित्र कैद हुआ है वह यहां से 260 किलोमीटर दूर बागेश्वर वन प्रभाग के ग्लेशियर रेंज में समुद्रतल से 4100 मीटर की उंचाई पर सुंदरढूंगा ग्लेशियर के पास दो माह पहले लगाया गया था।

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उन्होंने कहा कि यह तस्वीर कुमाऊं के उच्च क्षेत्रों में हिम तेंदुए की मौजूदगी का वैज्ञानिक प्रमाण हैं। डॉ. बिष्ट ने कहा कि हिम तेंदुए की मौजूदगी की रिपोर्ट और उसकी तस्वीर वनाधिकारियों और युवा वन्यजीव शोधकर्ताओं वाली फील्ड टीम से कल ही प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हिम तेंदुओं की मौजूदगी से यह भी पता चलता है कि वहां उसके शिकार के लिए थार, नीलगाय और कस्तूरी मृग जैसे जानवर भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं।

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हालांकि, इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट अभी आनी बाकी है लेकिन तस्वीर से पता चल रहा है कि हिम तेंदुआ स्वस्थ है, युवा है और उसका भविष्य उज्ज्वल है। डॉ. बिष्ट ने कहा कि दीर्घकालीन अध्ययन के तहत उसके भोजन और शिकार के लिए जानवरों की उपलबधता का पता लगाने के लिए जल्दी ही उसकी डीएनए प्रोफाइलिंग भी की जाएगी।