प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए जनसहभागिता जरूरी : सीएम

देहरादून।… उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 350 गांवों के अविलंब पुनर्वास, पहाड़ों में जलस्रोतों के पुनर्जीवन व नदियों में लगातार इकट्ठा होते जा रहे मलबे के निस्तारण की आवश्यकता पर काफी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए जनसहभागिता जरूरी है।

रावत ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य ले.ज (से.नि)एनसी मारवाह से अपने आवास पर मुलाकात के दौरान उन्हें अवगत कराया कि प्रदेश में लगभग 350 गांवों को चिन्हित किया गया है जो आपदा की दृष्टि से अति संवदेनशील हैं। उन्होंने कहा कि इनका सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास किया जाना बहुत जरूरी है। हालांकि, राज्य सरकार के लिए सीमित संसाधनों से इसे कर पाना कठिन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उतराखंड भूकम्प की दृष्टि से भी अति संवेदनशील क्षेत्र में आता है, इसलिए राज्य सरकार हर प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल को प्री-फैब स्ट्रक्चर में लाने की कार्ययोजना तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही प्रत्येक गांव में कम-से-कम एक पूर्णतया भूकंप रोधी सामुदायिक भवन बनाए जाने की भी योजना है।

सीएम के मुताबिक, पिछले कुछ समय से उत्तराखंड में नदियों की प्रकृति में बदलाव आ रहा है और लगातार मलबा जमा होते रहने से नदियों का तल उथला होता जा रहा है जिससे उसके निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है। उन्होंने कहा कि इससे जहां जानमाल का नुकसान होता है वहीं नदियों के किनारे के वनों को भी नुकसान होता है।

इस संबंध में रावत ने बताया कि उत्तराखंड ऐसा राज्य है जो कि हर साल लगभग आधा प्रतिशत भूमि जलकटाव के कारण खो रहा है। मारवाह ने कहा कि देश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर उत्तराखंड को श्रेष्ठ उदाहरण के तौर पर लिया जाता है और यहां आपदा प्रबंधन के लिए जिस प्रकार की पहल की गई है, वह दूसरे राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है।