जनसुनवाई में तीखे सवाल झेलने पड़े तो मुख्यमंत्री ने मीडिया पर निकाला गुस्सा

हरीश रावत बोले - ‘मीडियाकर्मी जाएं यहां से, हमें नहीं करानी कवरेज’

‘ये पब्लिक है, सब जानती है’ गाना तो आपने सुना ही होगा। लेकिन सरकार में बैठे लोग पता नहीं क्यों जनता को मूर्ख समझने लगते हैं। और जब भी वे जनता को मूर्ख समझकर उन्हें और बनाने की कोशिश करते हैं तो जनता उन्हें उनकी सही जगह भी दिखा देती है।

मंगलवार को एक जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ जो कुछ हुआ, वह नहीं होता अगर सिर्फ घोषणाएं करने की बजाय काम करके भी दिखाया होता। मुख्यमंत्री को जनता का गुस्सा झेलना पड़ा और उनकी जबरदस्त फजीहत हो गई।

दरअसल जनसुनवाई में आम लोगों से जुड़ी समस्याएं इतनी ज्यादा थीं कि पूरी सभा के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत उनसे बचने के लिए बहाने तलाशते रहे। मुख्यमंत्री ने कभी आर्थिक सहायता वाले मामलों से जांच कराने के नाम पर पल्ला झाड़ा तो कभी समस्याओं को छोटी बताकर बचने की कोशिश की।

सीएम बहाने बनाएंगे तो कार्यक्रम में हंगामा होगा ही। ऐसे में फजीहत से बचने के लिए मुख्यमंत्री का गुस्सा वहां मौजूद मीडियाकर्मियों बरस पड़ा। उन्होंने खुलेआम मीडियाकर्मियों को वहां से बाहर जाने को कह दिया। सीएम का इशारा मिलते ही पुलिसकर्मियों ने मीडिया को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया।

लॉर्ड वेंकटेश्वर हॉल में मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत के दो कार्यक्रम थे। पहला कांग्रेसियों से संवाद और दूसरा जन सुनवाई कार्यक्रम। संवाद कार्यक्रम में भी सरकार और संगठन की फजीहत ही हुई। कार्यक्रम में माइक छीनने से लेकर धक्कामुक्की तक की नौबत आ गई। यह सब कुछ होते देख मुख्यमंत्री हरीश रावत का पारा पहले से ही ऊपर चढ़ चुका था। इसके बाद जनसुनवाई कार्यक्रम शुरू हुआ। एक घंटा कार्यक्रम लेट होने के कारण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लोग जाने लगे थे।

इसी बीच हरिद्वार से आईं लता अग्रवाल गुस्से में चीख पड़ीं तो मीडियाकर्मी उनकी तरफ लपके। यह देख मुख्यमंत्री बिगड़ गए। बोले- ‘मीडियाकर्मी जाएं यहां से, हमें नहीं करानी कवरेज।’ कुछ देर बाद कार्यक्रम फिर शुरू हुआ, तो उस महिला के मामले को यह कहकर सुनने से इनकार कर दिया गया कि सुनवाई देहरादून के लोगों के लिए है, लेकिन महिला अपनी बात पर अड़ी रही।

अंत में मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया। हालांकि, मुख्यमंत्री बीच-बीच में कहते रहे कि ‘हम सब कुछ जान चुके हैं। कार्यक्रम बिगाड़ने की बहुत कोशिश हुई है, जिन्हें विश्वास नहीं है वे यहां से चले जाएं।’