देहरादून।… उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण को संस्कृति से जोड़ने के लिए पारंपरिक पर्व हरेला को आओ मनाएं हरियाला अभियान के रूप में चलाया जाएगा। यह अभियान 10 जुलाई से शुरू होगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिलाधिकारियों को इसकी व्यापक तैयारियां करने के निर्देश देते हुए कहा कि 18 जुलाई तक चलने वाले हरेला को मेरा वृक्ष-मेरा धन योजना से जोड़ा जाएगा।

किसी भी योजना की सफलता के लिए जनसहभागिता को आवश्यक बताते हुए रावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी जिसके लिए प्रत्येक गांव में हरियाला प्रतिस्पर्धा आयोजित होगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक पर्व हरेला को मेरा वृक्ष मेरा धन से जोड़ने पर लोग भावनात्मक रूप से इससे जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि गांवों में बैठक कर लोगों को इसकी जानकारी दी जाए और इसमें ग्राम पंचायतों, ब्लॉक, जिला पंचायतों, युवक मंगल दलों, महिला मंगल दलों, स्वयंसेवी संस्थाओं, जलागम तथा वन पंचायतों को भी इससे जोड़ा जाए।

योजना का प्रारूप बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले के एक-एक गांव में प्रभारी मंत्री, प्रभारी संसदीय सचिव और प्रभारी सचिव वृक्षारोपण करेंगे। इसी प्रकार जिलाधिकारी, जिला विकास अधिकारी, प्रभागीय वन अधिकारी, उपजिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ब्लॉक विकास अधिकारी तथा ग्राम्य विकास अधिकारी भी जिले के एक- एक गांव में वृक्षारोपण करेंगे।

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रावत ने कहा कि वृक्ष लगाने वाले व्यक्तियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये वृक्ष चारा प्रजाति, माल्टा, महुआ, अखरोट, पांगल एवं आंवला के होंगे और तीन साल तक वृक्ष की रक्षा का दायित्व वृक्ष रोपित करने वाले व्यक्ति का होगा। तीन वर्ष तक वृक्ष के सुरक्षित रहने पर उसे 300 रुपये प्रति वृक्ष दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 जुलाई को हरेला के त्यौहार के बाद प्रत्येक गांव में हरियाला प्रतिस्पर्धा होगी और सबसे अच्छे हरियाला (जौ की बालियां) वाली गृह स्वामिनी का चयन हरियाला महिला के रूप में कर उसे 500 रुपये प्रति माह का पुरस्कार दिया जाएगा।