रविवार से लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तराखंड के पूरे कुमाऊं क्षेत्र में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। झीलों की नगरी नैनीताल शहर में इस बारिश ने भारी तबाही मचा दी है। यहीं पहाड़ों से बहकर आ रहा पानी और मलबा लोगों के घरों में घुस गया है। 15 पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई संपर्क मार्गों पर यातायात के लिए बिल्कुल बंद हो गए हैं।

नैनीताल और चंपावत जिला प्रशासन ने मंगलवार को भी भारी बारिश की आशंका के चलते सभी निजी और सरकारी स्कूलों में ऐहतियातन छुट्टी की घोषणा की है। डीएम ने कहा कि जिले में यदि 12वीं तक का कोई भी स्कूल खुला पाया गया तो उस स्कूल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

नैनीताल में सिर्फ 24 घंटे के अंदर ही 388 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इतनी बारिश के कारण नैनीताल का आकर्षण नैनी झील का जलस्तर भी 9 फीट 4 इंच ऊपर उठ गया है। झील के पांचों निकासी द्वार खोल दिए गए हैं। हल्द्वानी में दो दिन में 205 मिमी बारिश हुई है और ऊधमसिंह नगर में 85 एमएम बारिश दर्ज की गई है।

landslide-in-nainital-road

पंत विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. एचएस कुशवाहा ने अगले 24 घंटे में अभी 50 मिमी बारिश की आशंका जताई है। उधर भारी बारिश के चलते पूर्णागिरि यात्रा पर लगी रोक के बाद यात्रियों को मायूस होकर लौटना पड़ा।

भारी बारिश में तीन मोटर साइकिलें भी नाले में बह गईं। पानी और मलबा जिला पंचायत रोड स्थित कांग्रेस नगर अध्यक्ष मारुति साह के घर में भी घुस गया। ओखलकांडा में दो पालतू जानवर नाले में बह गए। इस बारिश से रतीघाट-बेतालघाट मुख्य मार्ग समेत नैनीताल जिले के 13 ग्रामीण रास्ते पूरी तरह से बंद हैं।

खैरना-रानीखेत रोड में कनवाड़ी, भवाली-अल्मोड़ा एनएच में पाडली, रतीघाट, दोपाखी, भौर्या बैंड, छड़ा, लोहाली, जौरासी, काकड़ीघाट और सुयालबाड़ी में पहाड़ियों से पत्थर गिर रहे हैं।

landslide-in-nainital-road1

कुमाऊं मे अलमोड़ा जिले के कई स्थानों पर मलबा सड़क पर आने से विनायक-सिनार, बासोट-भिकियासैण मार्ग बंद है। इससे दिल्ली व अन्य शहरों से आए वाहन गंतवय तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में लोग वाहन बदल कर गंतवय तक पहुंच रहे हैं। फिलहाल बारिश के रुकने से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। रामनगर-ड़ोटियाल मार्ग पर झिमार के पास आधा दर्जन वाहन फंसे हैं।

अल्मोड़ा जिले में भी हाल ही में बनी भतरौंजखान-सिमलधार रोड़ कई जगह से बह गई है। यहां नैटी के पूर्व प्रधान गोविंद सिंह ने बताया कि उन्होंने आज तक ऐसी बारिश नहीं देखी है। हाल में बनी कच्ची सड़क जगह-जगह से टूट गई है। उन्होंने बताया कि यहां कई लोगों के आंगन (खौ) ढह गए हैं तो किसी के मकान पर ऊपर का खेत खिसक आया है।

चंपावत में रात से लगातार बारिश हो रही है। टनकपुर चंपावत हाईवे पर अमरूबैंड के पास मलवा व पेड आने से यातायात बाधित हो गया। दिल्ली-देहरादून से चंपावत-पिथौरागढ को आने वाली बसें भी मौके पर फंसी रही। सुबह करीब साढ़े आठ बजे इस हाईवे को खोल दिया गया।

बागेश्वर में सुबह से बारिश शुरू हो गई। जिले की सभी सड़कें खुली हैं। सितारगंज में भी लगातार बारिश से जलभराव की समस्या बनी है। नैनीताल में भी सुबह से तेज बारिश हो रही है। शहर को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें फिलहाल खुली हैं।

बारिश के चलते सोमवार को हेलीकॉप्टर रालम और मिलम (मुनस्यारी) के लिए उड़ान नहीं भर सके। रालम में फंसे पातो गांव के 22 बच्चों को लिंगुरानी नाले में लट्ठे डालकर पार करा लिया गया है। टनकपुर में 24 घंटे में 48 एमएम बारिश दर्ज की गई है। पिथौरागढ़ के थल, अस्कोट में भूस्खलन से कई मकानों को नुकसान हुआ है। पिथौरागढ़-धारचूला सड़क चरमा से आगे खिरचना में बंद है। थल-नाचनी-मुनस्यारी सड़क भी बंद है।