देश के ‘बुलेट ट्रेन’ के सपने को साकार करेगा अपना उत्तराखंड

भारत में 'बुलेट ट्रेन' दौड़ाने में अहम भूमिका निभाएगा IIT रुड़की संस्थान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में ‘बुलेट ट्रेन’ दौड़ाने का सपना देखा है। उनसे पहले के प्रधानमंत्री भी ऐसा सपना देखते रहे हैं, लेकिन अब तक ये सपना, सपना ही बना हुआ है। लेकिन अब इस ओर कुछ ठोस पहल होती दिख रही है। हम सब उत्तराखंडवासियों के लिए गर्व की बात ये है कि इस सपने को पूरा करने में उत्तराखंड का खास योगदान रहने वाला है। भले ही उत्तराखंड में आजादी के बाद पिछले करीब 68 साल में ट्रेन का विकास बिल्कुल ना के बराबर हुआ हो।

रेल मंत्रालय के सहयोग से जल्द ही देश में ‘बुलेट ट्रेन’ और उसके सब्स्टिट्यूट हाईस्पीड ट्रेन समेत विभिन्न रेल परियोजनाओं पर शोध के लिए आईआईटी रुड़की में रेलवे रिसर्च सेंटर की स्थापना होगी।

इस सेंटर में रेलवे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रहे संस्थान के वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। संस्थान में इससे पहले इस दिशा में कई शोध परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिसके चलते रेल परियोजनाओं पर साझा शोध के लिए साल 2014 में यूनाइटेड किंगडम की साउथम्टन यूनिवर्सिटी के साथ भी संस्थान का एमओयू साइन हुआ है।

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जैसा कि आप पहले ही पढ़ चुके हैं कि देश में हाईस्पीड ट्रेनों का संचालन नरेंद्र मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। केंद्र के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत इस परियोजना के लिए देश में ही आधारभूत ढांचा विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है।

इसके तहत आईआईटी रुड़की में रेल मंत्रालय की ओर से रेलवे रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए केंद्र और रेलवे मंत्रालय की ओर की जा रही प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में हैं।

संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप्त बनर्जी ने बताया कि एमओयू साइन होते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में संस्थान में इस दिशा में विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिसके तहत भविष्य में बढ़ती जरूरतों के अनुरूप रेलवे पुलों और सुरंगों का संरचनात्मक अध्ययन किया जा रहा है।

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ताकि इनके मौजूदा परिचालन एवं उपयोग को सुरक्षित रखा जा सके। ऐतिहासिक ढांचे में गिरावट का आकलन के तहत किए जा रहे शोध में ऐतिहासिक पुल आदि के ढांचे का आकलन किया जा रहा है। साथ ही इन्हें स्थायी रखे जाने की दिशा में काम हो रहा है। प्रो. बनर्जी के अनुसार वर्तमान में संचालित परियोजनाओं से भविष्य में हाईस्पीड ट्रेनों के संचालन में भी मदद मिलेगी।

इन पहलुओं पर भी चल रहा है काम

  • रेलवे पुलों के भार के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाना और नुकसान भी एक प्रतिशत तक ही रखना।
  • माल ढुलाई के उपयोग में लाई जाने वाली वैगन की सुरक्षा।
  • पैसेंजर ट्रेनों में यात्रियों की सुविधाओं में विस्तार करना।