विकास के लिए प्रकृति के साथ छेड़छाड़ जरूरी नहीं : केके पॉल

देहरादून। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के संरक्षण को बहुत महत्व दिया गया है। पर्यावरण और प्राणी एक-दूसरे पर आश्रित हैं। यही कारण है कि भारतीय चिंतन में पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा उतनी ही प्राचीन है , जितना यहां मानव जाति का ज्ञात इतिहास है। भारतीय संस्कृति का अवलोकन करने से ज्ञात होता है कि यहां पर्यावरण संरक्षण का भाव अति पुराकाल में भी मौजूद था।

इसी सिलसिले में पर्यावरण संरक्षण को भारत की परंपराओं में शामिल बताते हुए उत्तराखंड के राज्यपाल के के पॉल ने पेड़ लगाओ – पेड़ बचाओ अभियान में बच्चों को शामिल करने की बात कही जिससे वे समझ सकें कि विकास के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ जरूरी नहीं है।

पॉल ने नैनीताल में राज भवन परिसर में वन महोत्सव का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पेड़ों और नदियों को पूजने की प्राचीन भारतीय परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए देश में पर्यावरण संरक्षण के महत्व को दर्शाती है और पर्यावरण संरक्षण के लिए यह परंपरा बनी रहनी चाहिए। राज्यपाल ने इस दिशों में बच्चों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।