देवभूमि की बेटी कमला ने अमेरिका में जड़ा जोरदार पंच और जीत लिया गोल्ड मेडल

देवभूमि की बेटी कमला बिष्ट ने अमेरिका के वजीर्निया में चल रहे वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स-2015 में गोल्ड मेडल जीतकर देश और उत्तराखंड का नाम रोशन कर दिया है। उत्तराखंड पुलिस की हेड कांस्टेबल कमला बिष्ट ने बॉक्सिंग में 57 किलोग्राम भार वर्ग में लंदन पुलिस की रैशेल बॉलर को 3-0 से मात देकर गोल्ड अपने नाम कर लिया।

इसी के साथ उत्तराखंड पुलिस के खाते में छठा गोल्ड मेडल आ गया। पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू व आईजी कार्मिक दीपम सेठ ने हर्ष प्रकट करते हुए कमला बिष्ट के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन पर बधाई दी। उन्होंने मेडल विजेता खिलाड़ी को 20 हजार रुपये नकद पुरस्कार तथा प्रदेश सरकार से पांच लाख का पुरस्कार प्रदान करने की संस्तुति भेजने की घोषणा की।

पिथौरागढ़ की रहने वाली कमला की जिद ने उन्हें अमेरिका में इतिहास रचने का सुनहरा अवसर दिया। उनकी इस जीत से उत्तराखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है। चैंपियन बनकर कमला भी खुश हैं और उनके कोच एवं दोस्त भी। कमला ने 2003 से बॉक्सिंग कोच कृष्ण सिंह महर से प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। आज वह उत्तराखंड में युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

आज उनको यह गोल्ड उनकी जिद और खेल के प्रति जुनून के चलते मिला है। करीब तीन माह पहले वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स के लिए भारतीय पुलिस टीम की सूची बनने लगी थी। तब बढ़ती उम्र के कारण कमला बिष्ट (33 साल) को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया गया था और ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में उनसे हारी खिलाड़ी को चुना गया। इस बात का कमला ने विरोध किया। केवल इतना ही नहीं, कमला को प्रैक्टिस छोड़कर देहरादून आकर उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखनी पड़ी। पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आखिर में तमाम विरोध के बाद चयनकर्ताओं को सूची बदलनी पड़ी और कमला को वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स का टिकट मिला।

कमला के कोच कृष्ण सिंह महर के मुताबिक, शुरू से ही कमला में खेल के प्रति जुनून था। वर्ष 2003 में पहली बार कमला ने ग्लब्ज पहने और कुछ समय बाद ही नेशनल चैंपियनशिप में पहला गोल्ड जीता। इसके बाद फेडरेशन कप, ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में भी अपने पंच का दम दिखाया। हालांकि, कमला को अपनी उम्र और स्पीड के हिसाब से स्पाइरिंग (ट्रेनिंग फाइट) महिला पार्टनर नहीं मिल सके। इस वजह से कमला की लड़कों से फाइट करानी शुरू की।

शुरुआत में कमला झिझकी, लेकिन जब मोटिवेट किया तो दम लगाकर खेली और लड़कों को मात दी। अपने खेल के लिए वह बारिश के मौसम में भी पिथौरागढ़ से करीब 8 किलोमीटर दूर कुसौली गांव से दौड़कर मैदान पहुंचती थीं।

कमला बिष्ट 2006 में बॉक्सिंग से स्पोर्ट्स कोटे में महिला कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुईं। वर्तमान में वह काशीपुर में तैनात हैं। उनके नाम अनेकों उपलब्धियां हैं।

ये हैं उपलब्धियां-

  • 2005 में जमशेदपुर में हुई प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल।
  • 2007 में रुद्रपुर में हुई प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल।
  • 2008 में 9वीं राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता आगरा में ब्रॉन्ज मेडल।
  • 2009 में फेडरेशन कप तमिलनाडु में गोल्ड मेडल।
  • 2009 में 59वीं ऑल इंडिया पुलिस रेसलिंग क्लस्टर में गोल्ड।
  • 2010 में सीनियर वूमन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप केरल में ब्रॉन्ज मेडल ।
  • 2011 में पुलिस ऑल इंडिया रेसलिंग क्लस्टर जम्मू कश्मीर में ब्रॉन्ज।
  • 2012 में पुलिस रेसलिंग क्लस्टर सीआरपीएफ दिल्ली में सिल्वर।
  • 2014 में 63वीं ऑल इंडिया रेसलिंग क्लस्टर में गोल्ड मेडल।