उमा भारती की कांवड़ियों से अपील, पॉलीथिन का इस्तेमान ना करें

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती का कहना है कि नदियों पर बांध बनेंगे। लेकिन, उसकी मुख्य धारा प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करना ही होगा। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए उन्होंने कांवड़ियों से पॉलीथिन का इस्तेमाल न करने और ऋषिकेश में राफ्टिंग कैंप लगाने वालों से मल-मूत्र के निस्तारण के लिए कदम उठाने की अपील की है।

शुक्रवार को डामकोठी में संवाददाताओं से बात करते हुए उमा भारती ने कहा कि गंगा प्रदूषित न हो इसके लिए आयुष मंत्रालय गंगा किनारे मेडिसन प्लांट लगाएगा। इसकी देखरेख टास्क फोर्स करेगी। योजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को भी हरी झंडी दे दी गई है।

उन्होंने बताया कि प्रयाग, बनारस, हरिद्वार एवं कानपुर में गंगा की स्वच्छता के लिए फंड जारी कर दिया गया है। अगले साल हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा किनारे एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के फेज एक का कार्य पूरा हो जाएगा। इस योजना के तहत गंगा में जा रहे सीवरेज को किनारे पर ही रोका जाएगा। फिर राज्य सरकार उसका उपयोग सुनिश्चित करेगी।

12 बड़े शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की ओर से हरिद्वार व ऋषिकेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर उमा ने कहा कि ट्रिब्यूनल की कमान न्यायाधीश संभालते हैं। लिहाजा वह इस पर कुछ नहीं बोलना चाहती। ट्रिब्यूनल ने जो निर्णय लिया वह सही ही होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कांवड़ियों से पॉलीथिन का इस्तेमाल न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले के दौरान मल-मूत्र सीधे गंगा में न जाए इसके लिए वह प्रदेश सरकार से बात करेगी। जो भी मदद राज्य सरकार की ओर मांगी जाएगी उसे पूरा किया जाएगा।

इसके अलावा ऋषिकेश में राफ्टिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इसके खिलाफ नहीं है। लेकिन गंगा किनारों पर लगाए गए कैंपों में ठहरने वाले लोगों की गंदगी सीधे गंगा में जाती है। ऐसे में कैंप प्रबंधकों को मल-मूत्र के निस्तारण के लिए ठोस और कड़े कदम उठाने होंगे।