मुख्यमंत्री हरीश रावत के ‘घर’ में अंधेरा, पिछले 4 दिन से नहीं है लाइट

चमड़खान।… मुख्यमंत्री हरीश रावत के गृह क्षेत्र ककलासों पट्टी तथा सिलोर घाटी में चार दिन से लोग अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं। मोहनरी सहित डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांवों में हजारों की आबादी अंधेरे से लड़ने के लिए तेल की कुप्पी या छिलुकों (चीड़ की गोंद लगी लकड़ी) से काम चला रही है।

आलम यह है कि लोगों के पास मोबाइल की बैट्री चार्ज करने का तक का जुगाड़ नहीं है। ऐसे में इमर्जेंसी लाइट आदि विकल्प भी शोपीस बन गए हैं।

घाटी के डाबरघट्टी में अंधड़ के साथ आई तेज बारिश में एक विशालकाय पेड़ धराशायी हो गया था। इससे पास से गुजर रही हाई वोल्टेज लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद ककलासों पट्टी तथा सिलोर घाटी में हरीश रावत के पैतृक गांव मोहनरी सहित नैटी, सिमलधार, कनौली, चमड़खान, मेहलखंड, सिकुड़ा, नौगांव, थौली, पाली, डाभर, गंगोड़ा, मटेला, पंतगांव, धारड़, सिनौड़ा, हरनौली तथा भतरौजखान से सटे तमाम गांवों की बत्ती गुल हो गई। शुक्रवार को चौथे दिन भी आपूर्ति बहाल नहीं हो पायी।

ग्रामीणों ने बताया कि जैसे-तैसे गुरुवार शाम को कुछ देर के लिए लाइट आई, लेकिन फिर अंधेरा छा गया। विद्युत कर्मी पेड़ गिरने से आया फॉल्ट नहीं पकड़ पा रहे हैं। हालांकि विभागीय अफसरों ने दावा किया है कि जल्द ही फॉल्ट ढूंढ लिया जाएगा।

विपरीत हालातों में ग्रामीणों के लिए इमरजेंसी लाइट आदि वैकल्पिक व्यवस्था भी जवाब दे गई है। बैट्री चार्ज न होने से मोबाइल व अन्य उपकरण शोपीस बन गए हैं। बहरहाल, बरसात की दुश्वारियों के बीच अंधेरे से जूझने के लिए ग्रामीण तेल की कुप्पी व छिलुकों से रात काट रहे।