गंगा के सफाई अभियान को अंजाम तक पहुंचाएगी केंद्र सरकार की ये ‘फोर्स’

गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए केंद्र सरकार के ‘नमामि गंगे अभियान’ के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए अब गंगा इको टास्क फोर्स का गठन किया गया है। गंगा इको टास्क फोर्स की तीन टीमें होंगी जो उत्तराखंड के गांवों से लेकर दिल्ली तक अलग-अलग काम करेंगी। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती ने यह जानकारी दी।

देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में नमामि गंगे अभियान के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक गुरुवार से शुरू हुई है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने बताया कि अब तक यह अभियान केवल पांच राज्यों तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब गंगा बेसिन से जुड़े सभी 11 राज्यों को इसका हिस्सा बनाया जाएगा। उमा ने कहा कि गंगा स्वच्छता के लिए गंगा इको टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है।

साथ ही अब नमामि गंगे अभियान को उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड व पश्चिम बंगाल के साथ ही गंगा बेसिन के सभी 11 राज्यों में पहुंचाया जाएगा। पेड़ों की रक्षा के लिए नेहरू युवा केंद्रों के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके साथ ही गंगा में जैविकीय फिल्टर की स्थापना की जाएगी। गंगा बेसिन में भी पेड़ों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

इस तरह होगा तीन टीमों का गठन
पहली टीम : गंगा इको टास्क फोर्स की पहली टीम जिला स्तर पर बनेगी, जिसमें डीएम या कलक्टर मुख्य भूमिका निभाएंगे। वे अपने जिले के हर गांव को इस अभियान से जोड़ेंगे।

दूसरी टीम : यह टीम राज्य स्तर पर बनेगी। इस टीम का नेतृत्व संबंधित राज्य के मुख्य सचिव करेंगे। टीम में सचिव स्तर के लोग शामिल होंगे, जो नमामि गंगे की जिलावार समीक्षा के साथ ही देखरेख करेंगे।

तीसरी टीम : यह राष्ट्रीय स्तर की टीम होगी। इसकी अगुवाई कैबिनेट सचिव करेंगे। इस टीम का मकसद सभी राज्यों की सचिव स्तर की टीम के साथ समन्वय स्थापित करना होगा।