‘नमामि गंगे परियोजना’ में शामिल होने के लिए हरीश रावत ने मांगा बजट

गंगा स्वच्छता अभियान की राष्ट्रीय बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। बैठक में उन्होंने कहा कि अगर बजट मिले तो वे नमामि गंगे परियोजना में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने अगले साल 14 जनवरी से होने जा रहे अर्द्धकुंभ के लिए अब तक केंद्र से एक भी रुपया नहीं मिलने की बात फिर दोहराई।

हरीश रावत ने कहा कि हम स्वच्छता की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन ‘स्वच्छ भारत’ के तहत मिलने वाला बजट केंद्र ने आधा कर दिया है। अर्द्धकुंभ के लिए अब तक एक भी रुपया केंद्र सरकार से नहीं मिला है। उन्होंने उमा भारती सहित सभी केंद्रीय मंत्रियों से आह्वान किया कि वे उन्हें बजट देने में कंजूसी ना करें, तो वह ‘स्वच्छ गंगा अभियान’ में सबसे आगे खड़े होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि हर साल बरसात में गंगा में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, क्योंकि बड़ी तादाद में चीड़ के जंगलों में लगी आग की राख पानी में बहकर आती है।

उन्होंने केंद्रीय वन मंत्रालय से अनुमति मिलने पर चीड़ के करीब 125 हेक्टेयर जंगलों को काटकर उनकी जगह चौड़ी पत्ती वाले पौधे लगाने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य के जंगलों और आबादी को जंगली सुअर और रेत से भारी नुकसान हो रहा है। सीएम ने कहा कि गंगा को अविरल रखना है तो हमें उससे जुड़े छोटे-छोटे झरनों का भी ख्याल करना होगा।

चीड़ के जंगल काटने के मामले पर वन एवं वन्य जीव विशेषज्ञों ने साफ किया कि ये पेड़ यहां के वातावरण के चलते हैं। लिहाजा जंगल काटकर उनकी जगह नए पौधे पनपना बेहद मुश्किल काम साबित होगा।

बैठक में सीएम हरीश रावत ने जब बजट न मिलने की बात केंद्रीय मंत्रियों के सामने रखी तो केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने उन्हें पूरा आश्वासन दिया। उमा ने कहा कि अर्द्धकुंभ सहित नमामि गंगे अभियान के लिए केंद्र से पूरा बजट दिलवाएंगीं।