कभी ‘छोटी भूख’ को शांत करने वाली मैगी से अब बनेगा सीमेंट

रुद्रपुर।… मैगी को लेकर पिछले दिनों जमकर बवाल हुआ और देशभर में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। अब तक मैगी में गर्म पानी मिलाने पर 2 मिनट में बनकर छोटी भूख शांत करने वाली मैगी अब पानी मिलाकर पत्थर से बनने वाले सीमेंट उत्पादन का कारण बनेगी।

रुद्रपुर नेस्ले ब्रांड की मैगी अब सीमेंट प्लांट के ईंधन से बनेगी। यहां से प्लांट में दुकानों से मंगाई गई मैगी भेजी जाएगी। इससे पहले मामले को जिला प्रशासन व खाद्य सुरक्षा विभाग को अवगत कराया जाएगा।

सिडकुल रुद्रपुर में मल्टीनेशनल कंपनी नेस्ले इंडिया कंपनी है। यहां पर मैगी नूडल्स व पास्ता का उत्पादन होता है। मई में राज्य के पौड़ी जिले से नेस्ले इंडिया कंपनी की मैगी के दो नमूने राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषण लैब रुद्रपुर में जांच के लिए भेजे गए। इसमें एक नमूना फेल हो गया और इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाया गया।

सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए तीन जून को मैगी उत्पादन, भंडारण, वितरण व बिक्री पर 90 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया। पांच जून को एसडीएम विजय जोगदंडे व खाद्य अभिहीत अधिकारी मनीष कुमार सयाना ने नेस्ले फैक्ट्री में पहुंचकर जांच की तो उत्पादन की पांचों लाइनें बंद पाई गईं। इस दौरान गोदाम में 5156 मैगी की पेटियां बरामद हुईं। इस पर नॉट फार सेल का टेग लगा दिया गया। इसके बाद सयाना ने काशीपुर रोड स्थित अनंत इंटरप्राइजेज के यहां पांच हजार पेटियां बरामद कीं और इन पर नॉन फॉर सेल का टेग लगा दिया गया।

कंपनी के मुताबिक जिले के रिटेलरों व डीलरों से करीब दो हजार पेटी मैगी कंपनी के सीएनएफ ऋषिकेश भेजी गई हैं। मैगी को जलाने के लिए देश के 11 सीमेंट प्लांट चयनित हैं। हालांकि उत्तराखंड में सीमेंट का एक भी प्लांट नहीं है। करीब ढाई हजार मैगी की पेटियां सीमेंट प्लांट में ईधन बनेंगी। यह भी बताया गया कि सीमेंट प्लांट में मैगी भेजने से पहले जिला प्रशासन व खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों को अवगत करा दिया जाएगा। यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द मैगी भेजी जाएगी।