मान्यता नहीं होने का बावजूद कुमाऊंनी भाषा का साहित्य अकादमी में सम्मान

साहित्य अकादमी ने बुधवार को अपने तीन वर्ग भाषा सम्मान, युवा पुरस्कार और बाल साहित्य पुरस्कार 2015 की घोषणा की। तीनों ही वर्गों में अलग-अलग भाषाओं में सम्मान दिया गया।

इस अवसर पर खास बात यह रही कि भाषा सम्मान वर्ग में उत्तराखंड में बोली जाने वाली कुमांऊनी भाषा में काम करने वाले दो लेखकों को सम्मान दिया गया। जबकि कुमांऊनी भाषा को साहित्य अकादमी की मान्यता नहीं है। इसके अलावा बाल साहित्य के लिए अलग-अलग भाषा के विजेताओं के नाम की घोषणा की गई।

क्लासिकल मिडिवल लिट्रेचर (साउथ) में काम करने के लिए मीनाक्षी सुंदरम को पुरस्कृत किया गया। दूसरा पुरस्कार क्लासिकल मिडिवल लिट्रेचर (ईस्ट) पर काम करने के लिए आचार्य मुनिश्वर को मिला।

उत्तराखंड की कुमांऊनी भाषा में काम करने के लिए दो लोगों चारू चंद्र पांडे और मथुरादत्त मठपाल को भाषा सम्मान से नवाजा गया। दोनों ही बुजुर्ग लेखक हैं और उन्होंने उत्तराखंड की भाषाओं में कई किताबें व कविताएं लिखी हैं। सभी पुरस्कार विजेताओं को साहित्य अकादमी की ओर से एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

साहित्य अकादमी ने 23 भाषाओं में युवा लेखकों के नाम युवा पुरस्कार सम्मान के लिए घोषित किए। इसमें कहानी, उपन्यास सहित अन्य लेखन विधाएं शामिल हैं। सभी लेखकों की उम्र 35 साल से कम है। हिंदी भाषा में महिला लेखक इंदिरा दांगी को उनके उपन्यास के लिए सम्मान मिला है। अंग्रेजी में हांसदा शौभेंद्र शेखर को कहानी संग्रह के लिए यह सम्मान मिला है। सभी लेखकों को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।