दो साल पहले 16 जून 2013 को केदारनाथ में आयी प्रलयकारी आपदा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच आई आपदा ने वहां सबकुछ लील लिया था। एक बार फिर पहाड़ों में भारी बारिश के आसार बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने अलर्ट भी जारी कर दिया है।

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों को सचेत रहने को कहा है, लेकिन सरकार चार धाम यात्रा को जारी रखने का मोह नहीं त्याग पा रही। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो, जबकि भारी बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी यात्रियों को ही होने की आशंका है।

तीर्थयात्रियों को दुर्गम पहाड़ों में जाने से रोकने की मंशा फिलहाल तो नजर नहीं आ रही है। मौसम विभाग ने यात्रियों को बरसात और तापमान कम होने पर एहतिहात बरतने का सुझाव दिया है। उधर उत्तराखंड में मॉनसून ने भी दस्तक दे दी है।

मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर 24 से 26 जून तक ज्यादातर जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। अलर्ट मिलते ही सरकार भी हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सभी जिलाधिकारियों को सचेत रहने के निर्देश जारी किए।

चार धाम यात्रा मार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर खास निगाह रखने को कहा गया है। जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन इकाइयों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। मुख्य सचिव एन. रविशंकर ने एसडीआरएफ सहित संबंधित विभागों से बात की है।

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रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के जिलाधिकारियों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। मुख्य सचिव एन. रविशंकर ने भी शासन स्तर पर अधिकारियों की बैठक ली और जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। मुख्य सचिव ने तैयारी का भी जायजा लिया।

अलर्ट की तीव्रता, गंभीरता को लेकर सरकार और मौसम विभाग के बीच तनातनी भी कोई नई बात नहीं है। राज्य में अलग-अलग तापमान क्षेत्र होने से हर जगह के लिए सटीक पूर्वानुमान लगाना तकनीकि रूप से मौसम विभाग के लिए भी संभव नहीं हो पा रहा है।

दूसरी ओर आपदा प्रबंधन विभाग की दलील है कि सटीक जानकारी मिलने पर ही ऐहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं। ऐसे में मौसम विभाग का मंगलवार को जारी अलर्ट चार धाम यात्रा में रोड़ा ही ज्यादा माना जा रहा है। आपदा के दो साल बाद भी मौसम की सटीक जानकारी का तंत्र राज्य में विकसित नहीं हो पाया है।

जून 2013 की केदारनाथ आपदा के तुरंत बाद मौसम विभाग के अलर्ट को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ था। राज्य सरकार का कहना था कि मौसम विभाग ने भारी बरसात का सामान्य अलर्ट जारी किया था जबकि विभाग की दलील थी कि पूर्व चेतावनी जारी कर दी गई थी।

केदारनाथ की आपदा के बाद इतना जरूर है कि मौसम विभाग के अलर्ट को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। राज्य में एसडीआरफ का गठन किया जा चुका है और जिला प्रशासन भी अपनी तरफ से संवेदनशील है। पर मौसम की सटीक जानकारी का तंत्र प्रदेश में विकसित नहीं हो पाया है।

भारी बारिश से राज्य में नदी नालों का उफनना, बादल फटना, भूस्खलन आदि आपदाएं जुड़ी हुई हैं। इन सब मामलों में बरसात का पानी गुजर जाने के बाद ही आपदा प्रबंधन तंत्र कुछ करने की स्थिति में होता है। दूसरी ओर चार धाम यात्रा को लेकर सरकार अलग मूड में है।

मौसम विभाग का कोई भी अलर्ट चार धाम यात्रा के लिए भी खतरे की घंटी है। ऐसे में सरकारी मशीनरी की कोशिश यह भी है कि चार धाम यात्रा को न रोका जाए। ऐसे में मौसम विभाग और सरकार के बीच रस्साकसी का खेल भी शुरू होता दिख रहा है।

सरकार चारधाम यात्रा को पर्यटन और प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ मानती है, लिहाजा मौसम के अलर्ट मात्र से यात्रा को रोकने की मंशा फिलहाल जाहिर नहीं की जा रही है। हालांकि, मौसम विभाग ने यात्रियों को एहतियात बरतने का सुझाव दिया है।

मौसम विभाग ने रुदप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पौड़ी के कुछ इलाकों स्थानों में अगले 72 घंटों में भारी बारिश की आशंका जतायी है।