राज्यपाल केके पॉल ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक ली

देहरादून।… उत्तराखंड में उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के प्रयासों को धरातल पर उतराने के नजरिए के साथ राज्यपाल व कुलाधिपति डॉ. कृष्ण कांत पाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को राजभवन में राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की दूसरी त्रैमासिक बैठक बुलाई गई। पहली तिमाही बैठक 03 मार्च को बुलाई की गई थी, जिसमें विश्वविद्यालयों के बुनियादी उद्देश्यों को दोहराया गया था। दूसरी बैठक में, पहली बैठक में लिए गए निर्णयों पर विश्वविद्यालयों की प्रगति की समीक्षा के अलावा कुलपतियों द्वारा दी जा रही मासिक आख्या के कुछ प्रमुख बिन्दुओं पर भी चर्चा हुई।

बैठक में राज्यपाल ने ऐलान किया कि हर साल, किसी भी विषय पर प्रकाशित सबसे अच्छे शोधपत्र और अभिनव रचना (इन्नोवेशन) को राजभवन में ‘चांसलर्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ शोधार्थी को बीस हजार रुपये की नगद धनराशि भी दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘अनुसंधान व शोध ऐसा हो जो उत्पादकता बढ़ाने के लिए अंगीकृत किया गया हो या पेटेंट के लिए प्रस्तुत किया गया हो।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि यह ‘अवॉर्ड’ उत्कृष्टता के मानकों को प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय कर्मियों में उत्साह जगाएगा। साल 2014 के श्रेष्ठ शोधपत्र व अनुसंधान और अभिनव प्रयोग को इसी साल के अंत तक सम्मानित किया जाएगा।

राज्य के युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए विश्वविद्यालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश-विदेश के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों की तरह हमें भी लगातार बदलते वैश्विक वातावरण के अनुकूल अपने संस्थानों को ढालने की कोशिश करनी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित किया जा सकता है, बशर्ते कि वह निवेश समाज सेवा के सिद्धान्तों पर आधारित हो न कि शिक्षा के व्यावसायीकरण के उद्देश्य से। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका को उनके सामाजिक दायित्वों के रूप में स्थापित किया जा सकता है। विदेशों के कई श्रेष्ठ, निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालय, सामाजिक सेवा के अपने उत्तरदायित्वों को मजबूती से निभा रहे हैं।

पाठ्यक्रमों को गुणवत्ता युक्त व विश्वव्यापी मांग के अनुरूप बनाने की दृष्टि से राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों के कौशल को उद्योगों से जोड़कर रोजगार की गतिशीलता सुनिश्चित की जा सकती है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए जरूरी है कि वह ट्रेनिंग से उच्च शिक्षा को जोड़कर देश के मानव संसाधन को सक्रिय ऊर्जा के रूप में विकसित करे। राज्यपाल ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों में शैक्षिक उत्कृष्टता केवल गुणवत्तापूर्ण, व्यापक और स्थिर वातावरण में प्राप्त हो सकती है, जिसके लिए अनुश्रवण व निगरानी की प्रक्रिया बहुत जरूरी है। सतत् अनुश्रवण से अर्जित गुणवत्ता ही सदैव स्थिर रहती है। विश्वविद्यालयों से सम्बद्ध कॉलेजों में गुणवत्ता तथा छात्रों के बेहतर प्रदर्शन के लिए भी सतत् निगरानी व्यवस्था को जरूरी बताते हुए अनुश्रवण के महत्व के दृष्टिगत शैक्षिक और प्रशासनिक ऑडिट के लिए तीन कुलपतियों की एक समिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया। राज्यपाल ने सभी शिक्षण संस्थानों को रैगिंग फ्री की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।