पूरी श्रद्धा के साथ शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा, पहला जत्था रवाना

कैलाश मानसरोवर यात्रा शुक्रवार से शुरू हो गई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अल्मोड़ा से हरी झंडी दिखाकर 58 श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को दिल्ली से श्रद्धालुओं के जत्थे को रवाना किया था, जो शनिवार को धारचुला शिविर पहुंचेगा। उसने शुक्रवार को अल्मोड़ा से अपनी यात्रा आरंभ की।

श्रद्धालु आगामी 20 जून को 17,5000 फुट उंचे लिपुलकेश दर्रे से होते हुए चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। इस तीर्थ यात्रा के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर काम करने वाले कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के प्रबंध निदेशक धीरज गारबियाल ने कहा, ‘हमें श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएं मुहैया कराने की व्यवस्था की है और सभी रूट पर 100 से अधिक कर्मचारियों को तैनात किया गया है।’

उन्होंने कहा, ‘इस साल वार्षिक मानसरोवर यात्रा पर 18 से अधिक जत्थों में 1,000 से अधिक तीर्थयात्री जाएंगे।’ केएमवीएन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए धारचुला गाला और मालपा में एसडीआरएफ जवानों की तीन कंपनियों को तैनात किया गया है।’ इस बार कुल 18 जत्थे कैलाश मानसवरोवर की यात्रा पर जा रहे हैं। हर जत्थे में करीब 60 तीर्थयात्री होंगे।

गुरुवार को पहले जत्थे को रवाना करते हुए सुषमा ने कहा, तीर्थ यात्रा पर जाने वालों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए ट्रैकिंग प्रणाली सहित अन्य विस्तृत व्यवस्थाएं की गई हैं। पहला जत्था उत्तराखंड के लिपूलेख दर्रे वाले मौजूदा मार्ग से रवाना हुआ है।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर लोग इस साल दूसरे मार्ग, नाथूला दर्रे, से होकर भी जा सकेंगे। इस आशय की घोषणा चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पिछले वर्ष की थी।

नाथूला दर्रे के माध्यम से शुरू हो रहे दूसरे रास्ते के संबंध में सुषमा ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि तीर्थ यात्रा हेतु दूसरे मार्ग के लिए मेरे और चीनी विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत को हमारे प्रधानमंत्री ने सफलतापूवर्क आगे बढ़ाया है। उन्होने इस मामले को चीन के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समझ रखा है।’

मौजूदा मार्ग से करीब 60-60 यात्रियों के कुल 18 जत्थे कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाएंगे जबकि 50-50 श्रद्धालुओं के पांच जत्थे नाथूला दर्रे के रास्ते जाएंगे। सुषमा ने कहा कि ट्रैकिंग प्रणाली इसलिए लगायी गई है ताकि सरकार को तीर्थ यात्रियों के कल्याण और उनके स्थान का पता रहे।