मलेथा में भड़के ग्रामीणों ने बद्रीनाथ हाईवे किया जाम, पर्यटन मंत्री धनै का पुतला फूंका

लाठीचार्ज के आरोपी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से भड़के मलेथा के ग्रामीणों ने गुरुवार को करीब एक घंटे तक बद्रीनाथ हाईवे जाम रखा। इस दौरान सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम के बाद ग्रामीणों ने पर्यटन मंत्री दिनेश धनै का पुतला भी फूंका।

अन्न-जल त्याग कर अनशन कर रहे समीर रतूड़ी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा सम्मानजनक आश्वासन मिलने पर छठे दिन जल तो ग्रहण कर लिया लेकिन अभी उनका अनशन जारी रहेगा।

स्टोन क्रशरों के विरोध में उत्तराखंड के श्रीनगर में चल रहा मलेथा आंदोलन दिनोंदिन तेज होता जा रहा है। आंदोलनकारी समीर रतूड़ी ने छह दिनों से अन्न जल त्यागा हुआ था, आखिरकार उन्होंने पानी पी लिया, लेकिन अन्न ग्रहण नहीं किया। रतूड़ी ने छह जून को अनशनकारी हेमंती नेगी को उठाने के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ यह कदम उठाया है।

लाठीचार्ज के आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने पर भीड़के ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह 11.30 बजे हाईवे पर जाम कर दिया। जाम से भरी गर्मी में सैकड़ों यात्री प्यास से परेशान रहे।

एक घंटे के सांकेतिक जाम के बाद ग्रामीणों ने पर्यटन मंत्री दिनेश धनै के पुतले को आग के हवाले किया। आंदोलनकारियों ने जिस जगह पर जाम लगाया, वहां से एसडीएम कार्यालय व कोतवाली मात्र तीन किमी दूर है। इसके बावजूद एसडीएम व पुलिस प्रशासन घटना स्थल पर एक घंटे बाद पहुंचा।

एसडीएम दीपेंद्र नेगी ने बताया कि उन्हें 12.15 बजे जाम लगने की सूचना मिली। जबकि आंदोलनकारियों ने 11.30 बजे जाम लगा दिया था। मलेथा पहुंचने के बावजूद एसडीएम ने जाम स्थल से दूरी बनाए रखी। उन्होंने आंदोलनकारियों व यात्रियों से बात करना मुनासिब नहीं समझा।

जाम स्थल पर आंदोलनकारियों और हेमकुंड जा रहे यात्रियों में हाथापाई की नौबत आ गई। बुजुर्गों के बीच बचाव करने पर मामला शांत हुआ। बाइक सवार दो यात्री जाम तोड़ते हुए आगे बढ़ने लगे। इतने में एक आंदोलनकारी ने बाइक में पीछे बैठे यात्री को खींच लिया। हाथापाई होते देख बुजुर्ग आंदोलनकारियों ने किसी तरह स्थिति को संभाला।

जाम स्थल पर आंदोलनकारियों ने क्षेत्रीय विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप था कि स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के बावजूद मंत्री प्रसाद नैथानी उनका पक्ष नहीं रख पा रहे हैं।

आंदोलनकारियों ने लक्षमौली हादसे के घायल दिनेश डंगवाल को ले जा रही एंबुलेंस को भी नहीं जाने दिया। डंगवाल बुधवार को कार और सूमो की टक्कर में घायल हो गए थे। 6 जून की रात भी आंदोलनकारियों ने संवेदनशीलता को दरकिनार करते हुए 108 वाहन और बीमार को ले जा रही कार को भी रोक दिया था।