दहकती भट्टी बनी उत्तराखंड की वनभूमि, सैंकडों हैक्टेयर जंगल खाक

दिनोंदिन बढ़ती और प्रचंड होती जा रही गर्मी में उत्तराखंड के जंगल तेल के खुले कुंए की तरह बन गए हैं। यहां के तमाम जंगलों में जब-तब आग लगने की खबरें आ रही हैं। सैकड़ों हेक्टेयर में जंगल आग लगने से खाक हो गए हैं।

आग से सबसे ज्यादा नुकसान गढ़वाल मंडल के जंगलों को हुआ है। बेबस वन महकमे को अब बेसब्री से बरसात का इंतजार है, ताकी कुछ राहत मिल सके। काफी बड़े इलाके में नया प्लांटेशन जलने से भविष्य में जो जंगल तैयार होता उसकी संभावना को भी झटका लगा है।

मुख्य वन संरक्षक विधि प्रकोष्ठ पूरे राज्य में वनाग्नि पर नियंत्रण कार्यक्रम चलाने के साथ ही उसके ब्यौरे भी इक्ट्ठा करता है। उसके आंकड़े बताते हैं कि 9 जून तक राज्य में करीब 328 हेक्टेयर (254 आरक्षित और 74 हेक्टेयर सिविल सोयम) जंगल आग से सुलग चुके हैं।

गढ़वाल के जंगलों में आग लगने की घटनाएं कुमाऊं मंडल की तुलना में कई गुना ज्यादा हुई है। गढ़वाल में 168 वनाग्नि की घटनाएं हो चुकी हैं, कुमाऊं में इसकी तुलना में काफी राहत है। यहां पर केवल 39 जगहों पर आग लगने की घटनाओं की रिपोर्ट हुई है।

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इसमें तराई केंद्रीय वन प्रभाग के हल्द्वानी रेंज में ही करीब 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आग लगी है। कार्बेट पार्क, राजाजी नेशनल पार्क सहित वन्यजीव क्षेत्र भी आग से बचे नहीं हैं। तुलनात्मक तौर पर ज्यादा सुरक्षित माने जाने वाले इन जगहों पर 17 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। करीब साढ़े चार हेक्टेयर में नया प्लांटेशन भी जल चुका है।

लगातार बढ़ती गर्मी जंगलों में आग लगने की वजह तो बना हुआ ही है, इससे इंसानों का जीमा भा मुहाल हो गया है। गर्मी और उमस से उत्तराखंडवासियों को 13 जून के बाद कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग के मुताबिक 13 जून से आगामी 48 घंटों तक हल्की बारिश के बीच प्री-मानसून बारिश होने की संभावना है। हालांकि जून में सामान्य से कम बारिश होगी।

13 जून के बाद आगामी 48 घंटों तक प्रदेश में कई जगह हल्की बारिश होने से गर्मी से राहत मिल सकती है। इसके बाद प्री मानसून के आने का रास्ता साफ हो जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि राज्य में जून के अंतिम सप्ताह में मानसून दस्तक दे देगा।