केदारनाथ में आपदा के दो साल बाद भी मिल रहे हैं नर कंकाल

16 जून 2013 को आसमान से बरसी भीषण आपदा के दौरान केदारनाथ मंदिर के आसपास के ढहे और क्षतिग्रस्त बंद पड़े मकानों के मलबे में अब भी सैकड़ों मानव कंकालों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

ऐसे मकानों की तादात 150 से ज्यादा है। यात्रा के दौरान इन मकानों में यात्रियों की भरपूर मौजूदगी रहती थी। जिलाधिकारी राघव लंगर भी स्वीकार करते हैं कि बंद पड़े निजी आवासों में अभी तक खोजबीन नहीं की जा सकी है।
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नाराज तीर्थपुरोहितों का कहना है कि आपदा के दो साल बाद भी मंदिर के आसपास से मानव कंकाल मिल रहे हैं। इससे जिला प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही साफ पता चलती है।

केदारनाथ नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश बगवाड़ी का कहना है कि केदारपुरी के जर्जर और ढहे हुए मकानों के मलबे में सैकड़ों कंकाल दबे हुए हैं, लेकिन दो साल बाद भी प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कुल 217 में से 46 भवनों के मलबे को निकाला गया है। साफ किए और तोड़े गए ये सभी सरकारी भवन हैं जबकि शेष भवन तीर्थ पुरोहितों के हैं।

ज्ञात हो कि बीते शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को तीर्थ पुरोहितों ने मंदिर के पीछे बहल आश्रम के पास हाथ का एक पंजा दिखाया था।

कुछ तीर्थ पुरोहितों ने आशंका जताई थी कि अब भी केदारनाथ में मलबे से पटे जर्जर भवनों के कमरों में काफी कंकाल दबे हुए हैं। पर उनकी खोजबीन नहीं की जा रही है। 16/17 जून 2013 को आई आपदा के बाद से अब तक केदारनाथ मंदिर परिसर व क्षेत्र में लगभग दो सौ मानव कंकाल बरामद हो चुके हैं।

केदारनाथ में मंदिर के पीछे मिले हाथ के पंजे के बाद से पुलिस और एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन जारी है। मंदिर परिसर से तीन किमी के दायरे में कंकाल/शवों को ढूंढने का काम किया जा रहा है।

पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी विपिन चंद्र पाठक ने बताया कि केदारनाथ चौकी प्रभारी संदीप थपलियाल और एसडीआरएफ की टीम अभियान में जुटी है। रुद्रा प्वाइंट से लेकर मंदिर के पीछे बने हेलीपैड सहित मंदाकिनी नदी के किनारों को खंगाला जा रहा है।