मलेथा आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज की जांच के आदेश, आमरण अनशन जारी

मंडल आयुक्त सीएस नपलच्याल ने मलेथा में आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज के आरोप लगने के बाद इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। टिहरी के मुख्य विकास अधिकारी को यह जांच सौंपी गई है। आंदोलनकारी समीर रतूड़ी ने चौथे दिन भी पानी ग्रहण नहीं किया। उन्होंने कीर्तिनगर के कोतवाल एएस रावत और दारोगा राम सिंह गुसाईं के ट्रांस्फर के बाद ही जल ग्रहण करने की बात कही है। ग्राम प्रधान शूरवीर बिष्ट का आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा।
[manual_related_posts]

मलेथा में स्टोन क्रशर के विरोध में 13 दिन से अनशन पर बैठी हेमंती नेगी को शनिवार रात को जबरन उठा लिया था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस के लाठीचार्ज करने से उन्हें चोटें आईं। आंदोलनकारी दोषी अधिकारियों को दंडित करने की मांग कर रहे हैं। समीर रतूड़ी ने इस घटना के विरोध में अन्न-जल त्यागा हुआ है।

सोमवार देर शाम आयुक्त नपलच्याल ने इस घटना के जांच के आदेश दे दिए। उन्होंने सीडीओ टिहरी को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को एसडीएम कीर्तिनगर दीपेंद्र सिंह और तहसीलदार पुलिस बल के साथ इस आदेश को लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचे। रतूड़ी ने जांच का स्वागत करते हुए जल ग्रहण करने से मना कर दिया। रतूड़ी के अनुसार, डीएम ने कोतवाल और दारोगा का तबादला आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है।

मलेथा में लगभग 11 महीने से स्टोन क्रशरों के विरोध में ग्रामीण आंदोलन चला रहे हैं। प्रदेश शासन ने मलेथा में चार और चौपड़िया में एक क्रशर की अनुमति दे दी थी। इसके विरोध में ग्रामीणों ने आंदोलन किया। नतीजन डीएम ने क्रशरों की अनुमति निरस्त कर दी।

डीएम के आदेश के खिलाफ सत्यम शिवम सुंदरम स्टोन क्रशर संचालक हाईकोर्ट चला गया। कोर्ट की टिप्पणी के बाद डीएम ने अपना आदेश वापस ले लिया। इससे क्रशरों के संचालन की दोबारा से तैयारी शुरू हो गई। ग्रामीणों ने फिर आंदोलन चलाया। फरवरी में सरकार ने चार क्रशर रद्द कर दिए और एक की जांच का आश्वासन दिया।

इस बीच दो क्रशर संचालक हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने सरकार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद कार्रवाई करने के आदेश दिए। वर्तमान में पांच में से दो क्रशर निरस्त हो चुके हैं। तीन में से एक सत्यम शिवम सुंदरम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति खत्म होने के बावजूद चल रहा था।

इसको तीन जून को गढ़वाल आयुक्त के दौरे के दौरान सील कर दिया गया। वहीं दो क्रशर संचालित नहीं हो रहे हैं। स्टोन क्रशर प्रकरण में आंदोलनकारियों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की हुई है।