भले ही आप देश की राजधानी दिल्ली में रहते हों या फरीदाबाद, मेरठ, हल्द्वानी, कोटद्वार, देहरादून या नैनीताल में ही क्यों ना रहते हों। लेकिन जून की इस गर्मी ने हर किसी की तरह आपका भी बुरा हाल कर रखा होगा। ऐसे में किसी ग्लेशियर की सैर करने का मन किसका नहीं करेगा। लेकिन ग्लेशियर पर जाना ना तो आसान होता है ना ही सुरक्षित। लेकिन उत्तराखंड में पिंडारी ग्लेशियर पहुंचना जितना आसान है यह उतना ही सुरक्षित भी है।

पिंडारी पर देखें हमारी खूबसूरत गैलरी

यह विश्व प्रसिद्ध ग्लेशियर नंदा देवी और नंदा कोट पहाड़ों के बीच 3,353 मीटर (11,001 फीट) की ऊंचाई पर पिंडर घाटी में पिंडारी ग्लेशियर स्थित है। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह किसी स्‍वर्ग से कम नहीं है, क्‍योंकि हम पहले ही बता चुके हैं कि हिमालय के तमाम ग्‍लेशियरों में से यहां पहुंचना और ट्रेकिंग करना सबसे आसान है।

कितनी दूर :
पिंडारी ग्‍लेशियर का आधार शिविर (बेस कैंप) जिला मुख्‍यालय बागेश्‍वर से सड़क मार्ग के द्वारा करीब 36 किमी, अल्‍मोड़ा से 109 किमी, काठगोदाम से 199 किमी दूर है।

क्यों जाएं :
एडवेंचर स्‍पोर्ट्स (ट्रेकिंग) के शौकीन लोगों के लिए यह स्‍वर्ग है। इसके अलावा देश और दुनियाभर से लोग बर्फ और ग्‍लेशियर की खूबसूरती को कैमरे व आंखों में कैद करने के लिए भी यहां पहुंचते हैं। यहां पहुंचना आसान है तो जो लोग दुर्गम ग्लेशियरों में नहीं जा सकते लेकिन बर्फ का भरपूर लुत्फ लेना चाहते हैं, वे यहां आते हैं।

ग्‍लेशियर की लंबाई :
पिंडारी ग्‍लेशियर की लंबाई 5 किमी यानी करीब 3.1 मील है।

ट्रेकिंग का रास्‍ता :
पिंडारी ग्‍लेशियर का बेस कैंप सॉन्‍ग में है। यहां पहुंचने के बाद ट्रेकिंग के शौकीनों को 0 प्‍वाइंट तक 45 किमी यानी 28 मील की ट्रेकिंग करनी पड़ती है।

ये है ट्रैकिंग का रास्ता…
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सॉन्‍ग से लोहारखेत – 3 किमी ट्रैक
लोहारखेत से धकुड़ी – 11 किमी ट्रैक
धकुड़ी से खाती – 8 किमी ट्रैक
खाती से द्वाली – 11 किमी ट्रैक
द्वाली से फुरकिया – 7 किमी ट्रैक
फुरकिया से पिंडारी ग्लेशियर – 5 किमी ट्रैक

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