कैलाश-मानसरोवर यात्रा की तैयारी : नाभीढांग से लिपुलेख तक लगी लाल झंडियां

कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नाभीढांग से लिपुलेख के बीच आठ किलोमीटर के दायरे में आईटीबीपी ने लाल झंडियां गाढ़ने का काम शुरू कर दिया। यहां भारी बर्फ जमा होने के कारण मुख्य रास्ते का कोई अता-पता नहीं है। ऐसे में बर्फ के ऊपर लाल झंडियां लगाई जा रही हैं और रस्सियों से एक लकीर भी बनेगी। यात्री लाल झंडी देखकर आगे बढ़ेंगे और रस्सी की लकीर का ही सहारा लेंगे। पूरी उम्मीद है कि इस बार भी नाभीढांग से लिपुलेख तक दो यात्री दलों को बर्फ से होकर ही सफर करना पड़ेगा।

आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के जवान केदार सिंह रावत ने बताया कि जवानों की एक टीम नाभीढांग से लिपुलेख तक झंडियां गाढ़ने का काम करने लगी है। यह काम एक दो दिन में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नाभीढांग से लिपुलेख तक का ट्रैक सबसे जटिल है। इसमें तापमान शून्य से नीचे रहता है। यात्रियों को इस स्थान पर सूर्योदय से पहले ही सफर करना पड़ता है। क्योंकि सूर्य निकलने के बाद वहां पर तेज हवाएं चलने लगती हैं।

बर्फ के कारण पहले दो दलों के लिए विशेष सावधानी बरती जाती है। उन्होंने कहा कि तीसरे दल का सफर शुरू होते ही मानसून सीजन आ जाता है। तब नदी, नाले उफान पर आ जाते हैं। ऐसे में नदी, नालों में आईटीबीपी की रेस्क्यू टीम तैनात की जा रही है। गाला और बूंदी के बीच कई नाले बहते हैं। मालपा से गुंजी के बीच भी खतरनाक स्थानों पर रेस्क्यू टीम रहेगी।

कुमाऊं मंडल विकास निगम ने अपने सभी पड़ावों में नए बिस्तर पहुंचा दिए हैं। निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने बताया कि यात्रियों को हर पड़ाव में साफ सुथरा माहौल मिलेगा। साफ पानी के लिए सभी पड़ावों में वाटर फिल्टर लगा दिए गए हैं। रोशनी के लिए सोलर लालटेन का इस्तेमाल होगा। उन्होंने कहा कि शीतकाल में भारी हिमपात के कारण पड़ावों को जो भी नुकसान पहुंचा था, उसकी मरम्मत की जा चुकी है। यात्रा पड़ावों में सामान पहुंच गया है।