केदारनाथ आपदा पर महालेखा परीक्षक ने किया गड़बड़ी का ‘महा खुलासा’

केदारनाथ आपता के विषय में करीब महीने पुरानी सीएजी की रिपोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की अफसरशाही की गड़बड़ी का खुलासा किया है। महालेखा परीक्षक ने केदारनाथ आपदा में गड़बड़ी का महा-खुलासा किया है।

आरटीआई में आपदा राहत घोटाला सामने आने के बाद अब राज्य सरकार की किरकिरी महालेखा परीक्षक उत्तराखंड की एक रिपोर्ट भी कर रही है। मार्च 2015 में तैयार की जा चुकी इस रिपोर्ट को देर सवेर राज्य सरकार को सदन के पटल पर भी रखना पड़ेगा।

करीब 65 पेज की इस रिपोर्ट से जाहिर होता है कि राहत बांटने से लेकर अन्य कई मामले में खूब गड़बड़ियां हुईं। राज्य सरकार आपदा राहत घोटाले में राज्य सूचना आयोग के सीबीआई जांच की मांग को पहले ही ठुकरा चुकी है। हालांकि इसकी जांच इस समय मुख्य सचिव एन. रविशंकर कर रहे हैं।

अब सीएजी की एक रिपोर्ट भी पुष्टि कर रही है कि आपदा राहत के नाम पर राज्य में खासी गड़बड़ियां हुईं। हद तो यह हुई कि आपदा राहत में कहीं ज्यादा पैसा बांटने से गुरेज नहीं किया गया तो कहीं बेहद कम पैसा प्रभावितों को दिया गया। राहत का वितरण भी कापा अससमान रहा।

सीएजी ने जोशीमठ तहसील में 603 पशुओं की मौत की ऐवज में दिए गए 12.27 लाख रुपये की राहत पर ही सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2015 तक भी संबंधित विभाग इसका कोई जवाब नहीं दे पाए थे। तथ्यों से छेड़छाड़ का मामला पिथौरागढ़ की मुन्स्यारी तहसील में भी सामने आया।

आवेदकों ने 703 मृत पशुओं के लिए मुवाअजा मांगा, लेकिन रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर केवल 164 का ही मुआवजा दिया गया। सीएजी की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पिथौरागड़ और टिहरी में कृषि भूमि के नुकसान का मुआवजा 2.04 करेाड़ रुपये कम दिया गया।

सितंबर 2014 से लेकर फरवरी 2015 तक सीएजी ने आपदा प्रभावित पांच जिलों की आपदा प्रबंधन के लिहाज से लेखा परीक्षा कर इस रिपोर्ट को तैयार किया। कायदे में मई में हुए सत्र में इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए था। लेकिन यह रिपोर्ट अब आगामी सत्र में ही पटल पर आ पाएगी।