उत्तराखंड पुलिस पर गंभीर आरोप, मलेथा में लाठीचार्ज और महिलाओं के कपड़े फाड़े

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में श्रीनगर ‌स्थित मलेथा में लाठीचार्ज के विरोध में आंदोलनकारियों ने टिहरी जिले के कीर्तिनगर कोतवाली का घेराव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए।

रविवार को दोषी पुलिसकर्मियों का निलंबन नहीं होने पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी गई। इधर, पुलिस ने लाठीचार्ज की घटना से इनकार किया है। शनिवार रात करीब आठ बजे पुलिस ने 13 दिन से आमरण अनशन पर बैठी हेमंती नेगी को जबरन उठा लिया था।

इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों की बीच हुई धक्का-मुक्की में दोनों पक्ष के लोगों को चोटें आई थीं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज से ‘हिमालय बचाओ आंदोलन’ के नेता समीर रतूड़ी सहित 10 महिलाओं को चोटें आई। महिलाओं के कपड़े भी फाड़े गए।

घटना से आक्रोशित आंदोलनकारियों ने शनिवार रात आठ से दो बजे तक बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग जाम रखा। रविवार को मलेथा आंदोलन स्थल पर सभा के बाद आंदोलनकारियों ने कीर्तिनगर में जुलूस-प्रदर्शन किया।

एसडीएम के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजने के साथ ही उन्होंने कोतवाली का घेराव किया। यहां उन्होंने पुलिस, प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी आदेश के आंदोलनकारियों को पीटा। यही नहीं महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार भी किया गया है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व विमला देवी, देव सिंह और सीता देवी आदि कर रहे थे।

कोतवाली पहुंचे टिहरी के पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि आंदोलनकारी महिला को उठाना जरूरी था। अंधेरे में हल्की धक्का-मुक्की हुई है, लेकिन लाठीचार्ज नहीं किया गया है।

श्रीनगर मलेथा में स्टोन क्रशर के विरोध में 13 दिनों से अनशन पर बैठी हेमंती नेगी को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद ‘हिमालय बचाओ आंदोलन’ के नेता समीर रतूड़ी और ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट अनशन पर बैठ गए हैं।

रतूड़ी ने घोषणा की है कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक वह जल भी ग्रहण नहीं करेंगे। रतूड़ी इससे पहले भी स्टोन क्रशरों के विरोध में आमरण अनशन कर चुके हैं।