देहरादून के इस इलाके में आज भी चलता है ‘अंग्रेजों का कानून’

करीब 73 साल पहले दूसरे विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश सेना ने उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून सैन्य छावनी के इर्दगिर्द की निजी जमीन पर भवन निर्माण से संबंधित प्रतिबंध लगा दिए थे। अंग्रेजों के वे प्रतिबंध आज भी जस के तस यहां लागू है और सैकड़ों परिवारों को उन प्रतिबंधों से आज भी आजादी नहीं मिल पाई है। इस प्रतिबंध के कारण लोग अपनी ही जमीन का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

देहरादून में क्लेमेंटटाउन कैंट से गढ़ी कैंट के प्रेमनगर क्षेत्र के बीच पांच सौ एकड़ में फैली निजी जमीन 1942 में तत्कालीन पूर्व सैन्य कमान के जीओसी इन सी (जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ) के आदेश पर आज भी प्रतिबंधित है। जिसने वहां आदेशों का उल्लंघन कर भवन बना लिया वह छावनी परिषदों के अनुसार अवैध हैं। उसे पानी, सड़क, नाली तक की समस्या से जूझना पड़ता है।

भारत को आजाद हुए भी अब करीब 68 साल हो गए हैं। ब्रिटिश सेना अब नहीं रही, इन कैंटों पर अब भारतीय सेना का कब्जा है, लेकिन इन परिवारों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। कई बार सेना से यह परिवार प्रतिबंध हटाने की दुहाई दे चुके हैं, लेकिन सेना सुरक्षा की बात कहकर प्रतिबंध हटाने को कतई तैयार नहीं है।

दूसरे विश्वयुद्ध के समय यूरोप के युद्धबंदियों को ब्रिटिश सेना ने देहरादून छावनी में रखा था। इन यद्धबंदियों को स्थानीय लोगों से कोई बीमारी ना हो जाए इसके लिए कैंट एक्ट 1924 के तहत पूर्वी कमान ने विश्व युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र को निर्माण के लिए प्रतिबंधित कर दिया।

निजी भूमि पर निर्माण प्रतिबंध को हटाने की मांग को कई बार उठाया गया, लेकिन जीओसी इन सी मध्य कमान ने उसे खारिज कर दिया। सेना ने साल 2010 में प्रतिबंध को सुरक्षा कारणों से जारी 1942 का आदेश रखने का पत्र जारी किया है।

प्रतिबंधित क्षेत्र में करीब 300 एकड़ जमीन गढ़ी कैंट के प्रेमनगर क्षेत्र की है। इसमें केरी गांव, रागनवाला, मोहनपुर, स्मिथनगर का क्षेत्र शामिल हैं। दूसरे कैंट क्लेमेंटटाउन के छोटा भारूवाला, ओसले लाइन, लालढांग, मोथोरोवाला, दौड़वाला, डकोटा और इंद्रापुरी फार्म का कुछ हिस्सा शामिल है। यहां अधिकांश भूमि मालिकों के मकान अवैध हैं।

सेना ने क्षेत्र को तो प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन उसपर हो रहे अवैध निर्माण की तरफ से भी आंखें फेरी हुई हैं। छावनी परिषद न तो यहां मकानों के मानचित्र पास करती है न ही पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सड़क और सेनिटेशन की सुविधा दे सकती है। ऐसे में जमीन मालिक से जमीन खरीद कर बिल्डर धड़ाधड़ बिना नक्शा पास करवाए बड़े काम्पलैक्स, प्लॉट और फ्लैट बना रहे हैं।