शंकराचार्य का एक और विवादित बयान, कहा- हिंदू नहीं हैं केदारनाथ के मुख्य पुजारी

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अक्सर अपने बयानों से बवाल खड़ा कर देते हैं। अब उनका कहना है कि केदारनाथ के रावल हिंदू नहीं हैं। वे लिंगायन संप्रदाय के हैं, जो वेद-पुराणों को नहीं जानते हैं। जबकि वेद-पुराणों के आधार पर ही केदारनाथ ज्योर्तिलिंग की पूजा होती है। आपदा के बाद रावल ने ज्योर्तिलिंग को गुप्तकाशी ले जाने की बात कही थी, जो गलत थी। उन्होंने जोशीमठ का नाम ज्योर्तिमठ किए जाने की भी मांग की।

श्रीबद्रीनाथ-श्रीकेदारनाथ मंदिर समिति विश्रामगृह में पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि रावल बीकेटीसी का कर्मचारी है, जो वेतनभोगी होता है। साल 1973 में शंकराचार्य बनने के बाद से वे केदारनाथ रावल का विरोध करते आ रहे हैं, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।

बीकेटीसी के साल 1935 के एक्ट में भी लिखा गया है कि केदारनाथ में रावल सहित अन्य कोई भी पुजारी, पंडा यहां तक कि कर्मचारी गैर हिंदू नहीं होगा। उन्होंने गंगा नदी पर बिजली परियोजनाओं के निर्माण का भी विरोध किया। शंकराचार्य ने कहा कि गंगा जब तक अविरल नहीं बहेगी, तब तक उसकी सफाई संभव नहीं है।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में बद्री, केदार, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा 25 सौ साल पुरानी है। आदिगुरु शंकराचार्य ने अपने शिष्य टुटकाचार्य को इन धामों की पूजा का दायित्व सौंपा था। लेकिन बाद के सालों में कुछ समय तक यात्रा नहीं हो पाई। इस वजह से केदारनाथ में अन्य संप्रदायों के लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंच गए।

इस बीच नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू पुशापति ने केदारनाथ पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए। उन्होंने धाम में यात्रा को लेकर प्रशासन और निम के अधिकारियों से बातचीत की। अपने पारिवारिक दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने त्रिजुगीनारायण के भी दर्शन किए। मंगलवार को ही वे चमोली जिले के पीपलकोटी के लिए रवाना हो गए।