मुख्यमंत्री बोले, केदारनाथ राहत अभियान के दौरान मीट खा लिया तो क्या हुआ

2013 उत्तराखंड आपदा राहत के दौरान करोड़ो रुपये के भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद विपक्ष ने उत्तराखंड सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। मामले में विपक्ष की घेराबंदी का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि आपदा के दौरान अफसरों का मांस खाना कोई गलत बात तो नहीं है।

उन्होंने कहा, उस समय रुद्रप्रयाग में सेना, पुलिस, एसडीआरफ से लेकर अधिकारी और प्रेस के लोग भी मौजूद थे, तब अगर किसी ने चिकन-मटन खाया, तो इसमें बुरा भी क्या है। सेना और पुलिस के मेस में तो चिकन-मटन बनता ही है। रविवार को रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि मुख्य सचिव इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। वैसे तो जांच के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, लेकिन एक महीने के अंदर जांच रिपोर्ट सबके सामने होगी। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह बात सामने आई थी कि जून 2013 की आपदा के बाद जब लोग भूखों मर रहे थे, अधिकारी राहत कार्य के दौरान चिकन-मटन खा रहे थे।

अगस्त्यमुनि में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केदारनाथ में पुनर्निर्माण और चारधाम यात्रा का बेहतर संचालन है। ऐसे में इस समय वह अधिकारियों को किसी जांच में नहीं फंसाना चाहते। फिर भी जरूरत हुई तो आपदा राहत में भ्रष्टाचार की और जांच करवाई जाएगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

हरीश रावत ने कहा कि होटल से लेकर खाने-पीने और डीजल, पेट्रोल के बिल में गड़बड़ी के जो तर्क दिए जा रहे हैं, उस संबंध में सरकार पूरी जानकारी जुटा रही है। जब तक सरकार अपने स्तर से पूरी जांच नहीं करती, किसी तरह की कार्रवाई संभव नहीं है। गोविंदघाट में मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा इतनी बड़ी थी कि तब स्थितियां असाधारण हो गई थीं।

उन्होंने कहा, तेज राहत कार्य के लिए कुछ अधिक खर्च किया गया होगा। कुछ लोगों की ओर से किए गए अनावश्यक खर्च को देख सभी अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।