2013 आपदा घोटाला: हरीश रावत भी मुश्किल में, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए 2013 के आपदा राहत घोटाले ने मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित पूरी उत्तराखंड सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। शनिवार को विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को निशाने पर ले लिया।

राहत-बचाव कार्य के नाम पर हुए इस बड़े घोटाले के मामले में बीजेपी ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा है। बीजेपी का कहना है कि सरकार सीबीआई के बजाय मुख्य सचिव को जांच सौंपकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। आपदा उत्तराखंड के लिए अति-संवेदनशील विषय है। चारधाम यात्रा और पुनर्निर्माण के जरिए सरकार इस मामले में संतुलन साधने की कोशिश करती रही है।

आपदा राहत में बड़ी गड़बड़ियां सामने आने पर सरकार बचाव की मुद्रा में है तो विपक्ष के हमले तेज हो गए हैं। मामला पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल का है, इसीलिए विपक्ष उन्हें भी निशाना बना रहा है। इसलिए बहुगुणा को भी बचाव में उतरना पड़ा है।

Kedarnath-disaster

विपक्ष ने सीबीआई जांच की पहल न करने पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष की ओर से मामले की जल्द से जल्द जांच कराने की मांग भी की जा रही है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राहत के नाम पर जमकर बंदरबांट की गई। बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सतपाल महाराज मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस्तीफे की मांग तक कर दी।

गौरतलब है कि आपदा और बचाव कार्य के समय भी सतपाल महाराज कांग्रेस में थे और 2014 आम चुनाव से पहले वे बीजेपी में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। आपदा पीड़ितों की चिंता करने की बजाय यह सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी रही। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी इस मामले में सफाई देते फिर रहे हैं। उनका कहना है, आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान की कीमत कई गुना हो गई थी। जांच इस बात की होनी चाहिए कि सामान सस्ता था और दिखाया महंगा गया। अगर नहीं कोई गड़बड़ी है तो उसकी जांच तो होनी ही चाहिए।