हरिद्वार में खनन पूरी तरह से बंद, स्वामी शिवानंद ने पानी पिया

गंगा नदी में खनन के खिलाफ हरिद्वार में मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद के अनशन और जल त्याग से राज्य सरकार पर दबाव पड़ा और एक बार फिर हरकत में आई। शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार जिले में खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया।

इसके बाद, मुख्य सचिव एन. रविशंकर ने डीएम हरिद्वार और एसएसपी को पोकलैंड मशीनों से खनन न होने देने का निर्देश जारी किया। सफाई की आड़ में खनन के आरोपों के चलते डीएम ने आपदा राहत कार्य के तहत गंगा सफाई के काम का आदेश भी वापस ले लिया है। इस आदेश के बाद से स्वामी शिवानंद ने जल ग्रहण करना शुरू कर दिया है। लेकिन उन्होंने डीएम, हरिद्वार के निलंबन तक अनशन खत्म करने से साफ इनकार कर दिया है।

सरकार ने स्वामी शिवानंद को मनाने की जिम्मेदारी गढ़वाल मंडलायुक्त सीएस नपलच्याल को सौंपी है। मंडलायुक्त से बात न बनी तो फिर अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा शिवानंद से बातचीत करेंगे। गंगा में अवैध खनन के खिलाफ स्वामी शिवानंद 21 मई से अनशन कर रहे हैं।

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22 मई को उन्होंने जल का भी त्याग कर दिया था। दबाव में आई सरकार ने हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में खनन को पूरी तरह से बंद करने की संभावना टटोलने के लिए कमेटी बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से खनन बंद करने का आश्वासन मिला तो स्वामी शिवानंद ने 25 मई से जल ग्रहण करना शुरू कर दिया था।

प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए स्वामी शिवानंद ने 28 मई को एक बार फिर जल त्याग दिया था। इसके बाद 29 मई की शाम को हरिद्वार जिले की पुरानी कुंडी में खनन करने वालों और खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन समर्थकों के बीच फायरिंग से भी राज्य सरकार की किरकिरी हुई।

स्वामी शिवानंद ने इस मामले में चैंपियन का पक्ष लिया है। स्वामी शिवानंद का कहना है कि चैंपियन खनिज विकास परिषद के अध्यक्ष हैं। अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने का उन्हें पूरा अधिकार है। बहरहाल, इन सब मामलों से शनिवार को सरकार हरकत में दिखी और हरिद्वार में मशीनों से खनन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया।

मुख्य सचिव ने आदेश के अनुपालन का निर्देश दिया। शासन के सख्त रुख को देखते हुए डीएम हरिचंद्र सेमवाल ने 19 मई को जारी गंगा सफाई के आदेश को भी वापस ले लिया है। इससे पहले 18 मई को ही डीएम की ओर से गंगा की तलहटी में खनन के सभी निजी पट्टों पर रोक लगा दी गई थी। यानी अब जिले में खनन पर रोक से संबंधित तीन अलग-अलग आदेश प्रभावी होंगे।