टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग के लिए तेज होगी आंदोलन की धार

बागेश्वर।… आजादी के 68 साल बाद भी उत्तराखंड के पहाड़ों में ट्रेन नहीं पहुंच पायी है। समय-समय पर कुछ संगठन इसकी मांग तो जरूर करते हैं, लेकिन संसद में यहां के जनप्रतिनिधि अपनी बात मजबूती के साथ कभी नहीं रख पाए। टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति ने अब आंदोलन तेज करने की ठान ली है। समिति ने 31 मई सुबह 11 बजे भराड़ी और दोपहर दो बजे कपकोट बाजार में क्षेत्र के लोगों की बैठक बुलाई है।

संघर्ष समिति की अध्यक्ष नीमा दफौटी और महासचिव खड़क राम आर्या ने क्षेत्र के लोगों से बैठकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि ब्रिटिश शासनकाल में बागेश्वर को टनकपुर रेल लाइन से जोड़ने के लिए सर्वे हुआ था।

आंदोलन के बल पर यूपीए सरकार ने अपने शासनकाल में इस बहुआयामी मांग को राष्ट्रीय योजना में शामिल तो किया, लेकिन बजट की कोई व्यवस्था नहीं की गई। राज्य से पांचों सांसद बीजेपी के होने के बावजूद पिछले 68 सालों की तमाम सरकारों की तरह केंद्र की मोदी सरकार इस पुरातन मांग पर चुप बैठी हुई।

आंदोलन तेज किए बगैर अब दूसरा रास्ता भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि रेल लाइन के बिना क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से बैठकों में बढ़चढ़कर मौजूद रहने की अपील की है। ताकि गूंगी-बहरी सरकारों के कानों तक अपनी आवाज पहुंचायी जा सके।