तिलाड़ी कांड को हुए 85 साल, टिहरी राजा ने कराया था भीषण नरसंहार

उत्तरकाशी।… टिहरी राजशाही के काले अध्याय के तौर पर याद किए जाने वाले तिलाड़ी कांड को शुक्रवार को 85 साल पूरे हो गए। इसी दिन 85 साल पहले वनाधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण बैठक कर रहे निहत्थे मासूम ग्रामीणों पर राजा के सैनिकों ने अंधाधुध फायरिंग कर सौ से भी ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

यमुना नदी के किनारे तिलाड़ी के मैदान में 30 मई 1930 को इस नरसंहार को अंजाम दिया गया था। उस दिन रवांई परगने के ग्रामीण बड़ी संख्या में राजशाही की ओर से वन सीमा में ग्रामीणों की उपेक्षा के विरोध में इकट्ठा हुए थे। अपने हक-हकूक सुनिश्चित करने की योजना पर विचार हो ही रहा था कि टिहरी के राजा के वजीर चक्रधर जुयाल के निर्देश पर बंदूकों से लैस सैनिकों ने तिलाड़ी मैदान में जुटे ग्रामीणों पर फायरिंग शुरू कर दी।

कुछ गोलियों के शिकार बने तो कई लोग अपनी जान बचाने के लिए यमुना के तेज बहाव में कूद गए, लेकिन बच नहीं पाए। इससे 21 साल 47 दिन पहले बैशाखी के दिन पंजाब में जालियांवाला बाग में भी अंग्रेजों से स्वतंत्रता की मांग को लेकर इकट्ठा हुए लोगों पर अंग्रेज सैनिकों ने गोलियां बरसाई थीं, कहा जाता है कि इस घटना में 1800 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे।

हालांकि जलियांवाला कांड में मृतकों कि आधिकारिक संख्या 379 थी। दोनों घटनाओं में अपने हक की आवाज बुलंद करने वाले मासूम लोग क्रूरता का शिकार बने। तिलाड़ी की घटना को आज पूरे 85 साल बीत चुके हैं, लेकिन तिलाड़ी का गोली कांड आज भी यमुना घाटी के लोगों में सिहरन पैदा कर देता है।

वन कानूनों को सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीणों की शहादत ने आने वाली पीढि़यों में भी जोश भरा। रवांई परगना ही नहीं संपूर्ण रियासत में लोगों को वन अधिकार देने की मांग तेज हुई और जिसे आखिरकार राजा को भी मानना पड़ा।